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Pretty girl … क़ानू

dog show

वही रोज़ मरहा की ज़िन्दगी चल रही है,हमारी क़ानू के साथ। सर्दियाँ शुरू हो गईं हैं इसलिए हमारी क़ानू का काम भी बढ़ गया है।पहले तो सिर्फ अकेले ही छत पर खेलना-कूदना होता था,पर जब से हरी -भरी सब्ज़ियों यानी के मटर व मैथी की शुरुआत हुई है,क़ानू हमारे साथ बेहद बिजी रहती है। कुछ तो मटर खाने में बिजी और कुछ मटर के छिलकों के साथ खेलने में बिजी। आधे टाइम तो क़ानू रानी मटर के और हरी-हरी मैथी की डंडियों से घिरी रहती है। एक अलग से ही रूप में क़ानू पूरे दिन घूमती रहती है,एक तो क़ानू-मानू का प्यारा सा लाल रंग का स्वेटर और दूसरा क़ानू की फ्लॉवर जैसी पूँछ में फँसे हुए मटर के एक-आध छिलके या फ़िर मेथी की ही डंडी अपनी पूँछ में फंसाये घूमती रहती है। क़ानू की फ्लॉवर जैसी पूँछ का नया रूप सच में बहुत ही प्यारा और वो अंग्रेज़ी में कहते हैं न क्यूट लगता है। हरे-भरे छिलके जब अपने स्टफ टॉय जैसे सफ़ेद शरीर पर फँसा कर चलती है,तो हमारा मन होता है,कि क़ानू को अपनी गोद में दबोच लें और फ़िर छोड़ें ही नहीं। कहने के लिए और कहने के लिए ही क्यों आखिर है तो क़ानू कुत्ता..पर जब भी हम क़ानू की तरफ देखते हैं, तो हमारी दुनिया सिर्फ़ और सिर्फ़ क़ानू की गोल -गोल सुन्दर आँखों जो कि सच्चाई से भरी हुईं हैं.. और क़ानू की काली गोल गुलाबजामुन जैसी नाक जिसमें क़ानू हमारे लिए ढ़ेर सारा प्यार लिए घूमती है,सिमिट कर रह जाती है। क़ानू की हमसे सच्ची मित्रता ही नहीं बल्कि हमारी आत्मा से पूरी तरह से जुड़ाव है,इसका। है,तो रोज़ का वही रूटीन पर क़ानू के साथ हर दिन नया और ताज़गी भरा लगता है। सुबह क़ानू के साथ उठने का अलग मज़ा होता है,शाम को भी जब हम क़ानू को घुमाने लेकर जाते हैं, तो उसमें एकदम नई बात होती है…कोई न कोई नया करतब तो रोज़ का बनता ही है,हमारी प्यारी और सबसे न्यारी क़ानू का।
हाँ! तो हुआ यूँ कि एक दिन हम शाम को अपनी कॉलोनी में ही क़ानू के साथ सैर करने निकले थे,कि हमारी मुलाकात कॉलोनी के प्रेजिडेंट से हुई थी। प्रेजिडेंट साहब को देखकर क़ानू पहले तो ज़ोर-ज़ोर से भौंकने लगी थी,पर वे बिल्कुल भी न डरे और हमारे ही पास आकर ख़ड़े हो गये थे। क़ानू रानी का उन्हें देखकर भौंकना बन्द ही नहीं हो रहा था, पर हमारे प्रेजिडेंट साहब भी कम न थे,आख़िर उन्होंने भी ग्रेट den वाली ब्रीड का कुत्ता पाल रखा है।इसलिए उन्हें कुत्तों से कैसे डील किया जाता है, बखूबी आता है।उन्होंने बिना डरे क़ानू के नज़दीक जा क़ानू के सिर पर हाथ फेरा और क़ानू को जम्प करा थोड़ी सी देर क़ानू के साथ खेल में वयस्त हो गए थे।बस!इतनी सी देर में ही क़ानू और हमारे प्रेजिडेंट साहब की दोस्ती हो गई। क़ानू ने भी भौंकना बन्द कर दिया था, और अब आराम से खड़े होकर अपनी फ्लॉवर जैसी पूँछ हिला रही थी। अब थोड़ा बातचीत कर सकते थे,क्योंकि पहले तो क़ानू ही सुनने नहीं दे रही थी,इतना तेज़-तेज़ भौंकने लगी हुई थी।
खैर!प्रेजिडेंट साहब ने अब अपनी बातचीत शुरू की…उनका कहना था कि” पीछे जो कॉलोनी में नया वाला पार्क बना है,उसमें हम एक प्रतियोगिता रखना चाहते हैं। यह प्रतियोगिता थोड़ी नई तरह की होगी ,जिसमें सभी कॉलोनी वाले जिन के पास कुत्ता है,भाग ले सकते हैं, और इस प्रतियोगिता द्वारा सभी कॉलोनी वालों का यानी के बच्चे,बुज़ुर्ग और बड़ों का एक अलग तरह का मनोरंजन हो जाएगा। प्रतियोगिता सम्पन्न होने के बाद दोपहर के भोजन की व्यवस्था भी मैने पार्क के ही एक तरफ़ करवा दी है। प्रतियोगिता के पश्चात पहले जिन लोगों के पास कुत्ता है,वो अपने कुत्ते को घर छोड़ आएँगे, फिर आराम से लंच का प्रोग्राम भी एन्जॉय कर लेंगें”। प्रतियोगिता और लंच वाली बात तो हम प्रेजिडेंट साहब की समझ रहे थे,पर यह बार-बार जिन लोगों के पास कुत्ता है, यह हमारी समझ से बाहर था। आख़िर अपना confusion दूर करने के लिए हम पूछ ही बैठे थे,प्रेजिडेंट साहब से,” बाकी तो हम समझ गए पर हमें माफ़ कीजिये बार-बार आपका यह बोलना कि जिन लोगों के पास कुत्ता है,हम समझ नहीं पा रहे हैं”। हमारी बात सुन प्रेजिडेंट साहब ज़ोर से ठहाका लगाकर हँसे थे,कहने लगे,”अरे!बहनजी प्रतियोगिता ही तो कुत्तों की है..फैशन शो रखा है,हमनें कुत्तों का पार्क में..जिन-जिन के पास कुत्ता है,हमनें सभी को बता दिया है,वैसे तो मुझे क़ानू अच्छी तरह से याद थी, और मैं आपके घर आने ही वाला था,पर आपको और क़ानू को घूमते देखा तो सोचा चलो यहीं बताता चलूँ। प्रतियोगिता में जो भी कुत्ता विजयी होगा उसे डॉग ऑफ द कॉलोनी का ख़िताब दिया जाएगा और जो फीमेल डॉग विजयी रहेगी उसे pretty गर्ल ऑफ द कॉलोनी की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। क़ानू तो कितनी प्यारी और देखने मे भी क्यूट और सुन्दर है,आप क़ानू को प्रतियोगिता का हिस्सा अवश्य बनाइएगा”। हमें फैशन शो की हर तरह की जानकारी देकर और निमंत्रण का कार्ड हमारे हाथ में थमा कर प्रेजिडेंट साहब वहाँ से चले गए थे।
हम और क़ानू अब घर लौट आये थे। हमनें यह पीछे वाले पार्क में हो रहे फैशन शो की बात बच्चों और पतिदेव से घर आते ही बताई थी..हमारी बात बीच में ही काटकर पतिदेव का कहना हुआ था,”अच्छा,हाँ!हाँ! मिले थे ,हमे भी प्रेजिडेंट साहब से पर बस,हमें तो लंच के विषय में ही बता रहे थे, और कुछ रुपये पैसे भी जमा करवाये थे..तो वो यह प्रतियोगिता का क़िस्सा है..चलो अच्छा है,इसी बहाने सब का मन भी और सा हो जाएगा और कुछ नयापन भी देखने को मिलेगा। तुम भी अपनी क़ानू-मानू को कर लो तैयार,हम चाहते हैं, कि क़ानू प्रतियोगिता में भाग ले..और कुत्तों का यह फैशन शो जीतकर हमारी कॉलोनी में नाक ऊँची करे”।
चलो भई, चारों तरफ़ से परमिशन मिल चुकी थी।बच्चों ने भी ज़ोरों से शोर मचा दिया था”हुर्रे! क़ानू इस गोइंग to विन this शो”। अब तो घर में एकदम आपाधापी सी मच गई थी। पता नहीं क्यों सब अपना आपा ही खो बैठे थे.. पता नहीं कुत्तों का फैशन शो न होकर न जाने कौन सा लैक्मे फ़ैशन शो हो गया था। इस सब तमाशे को क़ानू आराम से अपनी फ्लॉवर जैसी पूँछ को गोल घुमाकर और सारा का सारा ध्यान अपनी गुलाबजामुन जैसी नाक में केंद्रित कर सबको आराम से निहार रही थी, सोच रही थी,”कैसी-कैसी अजीब सी हरकतें कर रहें हैं ये लोग..क्या हो गया है,इन्हें आज”। बस,हमारे भी दिमाग़ में अब तो फिट हो गया था, जीतेगी तो हमारी क़ानू-मानू ही। हम भी बच्चों के साथ प्रतियोगिता की पूरी तैयारी में जुट गए थे,हमें नया और बेहद प्यारा काम भी मिल गया था..अच्छा टाइम पास तो खैर! था ही।
हमारे पास क़ानू के जन्मदिन की पिंक और रेड कलर वाली फ्रॉक रिब्बन और क़ानू के डार्क ब्राउन कलर के जूते जो हम डॉक्टर साहब से लाये थे,हमनें अभी सँभाल कर रखे थे। जूतों का आईडिया तो हमनें बिल्कुल ही कैंसिल कर दिया था, क्योंकि जूतों में क़ानू को चलने में थोड़ी तकलीफ महसूस होती थी, बाकी फ्रॉक और कानों के चारों तरफ़ हम रेड रिब्बन बाँधेंगे वो आईडिया हमारा एकदम पक्का था। बाकी इसमें हमारे ख़याल से कोई ख़ास ट्रैनिंग की ज़रूरत नहीं होती है…क्योंकि अक्सर हमनें टेलीविज़न शो में देखा है,कि कुत्तों को चैन और पट्टा बाँधकर आराम से जल्दी-जल्दी रैंप पर चलाते हैं। हाँ!कुत्तों का ड्रेसिंग स्टाइल ज़रूर अपने-अपने हिसाब का ही होता है।
चलो!भई!दोपहर को क़ानू को लेकर पार्क जाना है। आज सवेरे ही सब जल्दी उठ गए थे, और क़ानू तो रोज़ की तरह ही उठ गई थी.. हमनें क़ानू के गाल पर एक मीठी पप्पी देकर क़ानू को बेस्ट ऑफ लक भी विश कर दिया था। बच्चों को और पतिदेव को भी जल्दी-जल्दी लग रही थी। सबने हमसे कह दिया था”खाने-वाने के झंझट में मत पड़ना वो तो हम वहीं पार्क में जाकर करेंगें, बस तुम क़ानू को नहला-धुला कर परी बनाकर रेड्डी कर दो”। हमनें भी सबकी बात झट्ट से मान ली थी..आख़िर हमनें अपनी क़ानू को विजयी बनाने का जो मन में ठान लिया था। बस,तो हमनें क़ानू को बढ़िया ढँग से शैम्पू से निहलाकर धूप में पूरी तरह से सूखा दिया था,धूप में सूखने के बाद हमारी क़ानू एकदम सफेद फूला हुआ ऊन का गोला लग रही थी। इतनी सुंदर वाइट रोज़ दिख रही थी,हमारी क़ानू की हमारा तो मन हो रहा था,कि आज तो हम अपने प्यारे से सफ़ेद गुलाब को अपनी ही गोद में बिठा कर बस ढ़ेर सारा प्यार ही करते रहें। पर नहीं, हमनें अपने मन को फ़िर से एक बार समझाया था,कुछ भी हो प्रतियोगिता तो क़ानू ही जीतेगी।
चलो भई, दोपहर के लगभग बारह बज गए थे, और पार्क चलने का समय हो गया था। हमनें भी क़ानू को उसकी पिंक व रेड कलर मिक्स फ़्रोक पहनाकर और क़ानू के कानों के साइड में रेड कलर के सैटर्न रिब्बन बाँध कर पूरी तरह से डॉल की तरह तैयार कर दिया था। वाक्यई लिटिल प्रिन्सेस लग रही थी आज तो हमारी क़ानू।
“चलो, भई! हम आज पार्क तक जाने के लिए कार निकाले देते हैं.. सब साथ में चलेंगे क़ानू को लेकर। और हाँ!चैन और पट्टा हाथ में लेना मत भूलना”। अपनी लिटिल डॉल को प्यार कर-कर सबने प्यार से कार में बिठाया था।और धीरे से क़ानू के कान में कहा था,”जीतेगा न काना”। क़ानू अपनी पिंक कलर की जीभ साइड में लटका और अपनी गर्दन और आँखों को घुमा कर सबको हैरानी से देख रही थी। हालाँकि फ़्रोक के मज़े तो ले ही रही थी..क़ानू हल्की सी सर्दी जो शुरू हो गईं हैं।
“चलो!भई उतरो.. संभल के उतारो क़ानू को, चैन और पट्टा टाइट रखना बाकी के लोग भी ला रहें हैं.. अपने कुत्तों को”। हमनें क़ानू का चैन और पट्टा टाइट कर क़ानू को नीचे कार से उतारा था। पार्क में प्रेजिडेंट साहब ने बहुत अच्छा इंतेज़ाम कर रखा था, कुत्तों के फैशन शो का। अच्छा बड़ा टेन्ट लगवा रखा था,और पार्क के स्टेज पर कुत्तों के लिए रैंप वॉक भी बनवा रखा था। ऊपर बोर्ड पर लिखा था..”फैशन शो ऑफ डॉग्स”
सभी अपने कुत्तों को तरह-तरह की पोशाक पहना कर लाये थे। अब अनाउंसमेंट हो चुकी थी,और सभी प्रतियोगी अपने कुत्तों को लेकर स्टेज के पीछे जाकर खड़े हो गए थे। हम भी अपनी क़ानू को ले जाकर स्टेज के पीछे ख़ड़े हो गए थे। कुत्तों का नाम आते ही मालिक को कुत्ते को लेकर स्टेज पर रैंप वॉक के लिए कुत्तों को जल्दी-जल्दी लेकर जाना था। बारी-बारी सबका नाम आ रहा था,और सब अपने कुत्ते को चैन और पट्टे में ले जाकर रैंप वॉक कराकर वापिस लाते जा रहे थे। अब हमारा नम्बर भी आ गया था..क़ानू को लिए हम भी रैंप वॉक के लिए स्टेज पर पहुँचे थे। क़ानू ने अपनी पिंक कलर की जीभ साइड में लटका कर और अपनी फ्लॉवर जैसी पूँछ हिलाकर शान से रैंप वॉक किया था। ईश्वर का लाख-लाख शुक्र था,कि क़ानू बिल्कुल भी न भोंकी थी.. बल्कि अपने घुँघरू वाले पट्टे को हिलाकर और छन-छन कर अपनी पिंक और रेड कलर मिक्स फ्रॉक में चलते हुए रैंप वॉक एन्जॉय किया था।
फैशन शो ख़त्म हो चुका था,और सभी कॉलोनी वाले मित्रों का अब लंच टाइम था।पर पहले अपने-अपने कुत्तों को घर छोड़ कर आना था। दोपहर के भोजन के पश्चात ही विनर का अनाउंसमेंट होना था। बस!तो हमनें क़ानू को कार में ही पतिदेव से कहकर घर छुड़वा दिया था। वाक्यई खाना बहुत ही टेस्टी बनवा रखा था, प्रेसिडेंट साहब ने। कई तरह के वयंजन थे,भोजन में। ओवरआल कार्यक्रम बेहद अच्छा था। पतिदेव ने भी हमें भोजन में जॉइन कर लिया था, क़ानू को घर छोड़ आये थे। उन्होंने हमें बता दिया था,कि क़ानू का चैन पट्टा खोलकर घर छोड़ आये हैं, और क़ानू की फ्रॉक वगरैह उतार कर क़ानू को फ्री कर दिया है,ताकि क़ानू आराम से खेलती रहे जब तक हम लौटें।
लगभग फैशन शो और मिलन समारोह अब समाप्त हो चुका था, अब आख़िरी काम जो बचा था, वो था विनर का अनाउंसमेंट। लो! भई प्रेजिडेंट साहब अब विनर का अनाउंसमेंट करने के लिये माइक हाथ में लिये स्टेज पर खड़े थे…. “और आज के फैशन शो की विनर हैं…
क़ानू!!…क़ानू को आज के फैशन शो में pretty girl की उपाधि से सम्मानित किया जाता है, और साथ में एक चॉक्लेट भी गिफट में दिया जाता है “। क़ानू के विनर का नाम आते ही हम सब खुशी से उछल पड़े थे, क़ानू के गिफट का चॉक्लेट हाथ मे लिए, जो कि कुत्तों वाला ही चॉक्लेट था..और सभी अड़ोसी-पड़ोसियों की मुबारकबाद लेते हुए झट्ट से घर पहुँचे थे। घर पहुँचते ही क़ानू अपनी फ्लॉवर जैसी पूँछ हिलाते हुए उछल कर दोनों हाथ हमारे ऊपर लगाकर खड़ी हो गई थी। हमनें भी क़ानू को ढ़ेर सारा प्यार कर और गले लगाकर क़ानू को क़ानू के विनर होने की बधाई दी थी, और क़ानू का ईनाम क़ानू की चॉक्लेट भी क़ानू को प्यार से खिलायी थी।
क़ानू के”pretty girl” का ख़िताब जीतने की खुशी में आज हमारा पूरा घर बेहद खुश था। इसी खुशी में हमनें भी छोटा सा जश्न क़ानू संग मना ही डाला था। क़ानू के संग ज़िन्दगी के फैशन शो यूँहीं जीतते, हँसते और मुस्कुराते एक बार फ़िर हम सब चल पड़े थे..क़ानू के संग।