राम चरन भाग एक सौ छह

राम चरन भाग एक सौ छह

जंग होगी। जगत की जंग होगी। और मुनीर खान जलाल मन प्राण से लड़ेगा इस जंग में। “क्योंकि उसे अब हर कीमत पर, हर हाल में और हर-हर मायनों में संघमित्रा को हासिल करना ही था। “तुम तो सलमा के लिए भी लड़े थे, मुनीर? तुमने तो ..” वक्त पूछ बैठा था।...
राम चरन भाग एक सौ छह

राम चरन भाग एक सौ पांच

राम चरन की बड़े तड़के ही आंख खुल गई थी। वह उठा था और तैयार होने लगा था। आचार्य प्रहलाद ने अपने आने का कोई समय नहीं बताया था अतः राम चरन नहीं चाहता था कि पहले वाली गलती फिर हो जाए। इस बार वह कोई गलती करना ही न चाहता था। उसने अपने मन में आचार्य प्रहलाद के आगत स्वागत की...
राम चरन भाग एक सौ छह

राम चरन भाग एक सौ चार

ढोलू शिव के वार्षिकोत्सव का आज समापन दिवस था। इस बार की पूरी व्यवस्था आचार्य प्रहलाद और पंडित कमल किशोर ने की थी। बीच में दो बार इंद्राणी और कुंवर साहब व्यवस्था देखने आए थे। वो प्रसन्न हो कर लौटे थे। आज भी समापन समारोह की व्यवस्था श्रेष्ठ थी। विशाल शामियाना लगाया गया...