by Major Krapal Verma | May 29, 2024 | राम चरण
आज पहला नवंबर था। मुनीर खान जलाल को याद था कि आज बलूच ने टेकओवर करना था। पाकिस्तान में घी के चिराग जलेंगे या कि बुझेंगे, वह अनुमान नहीं लगा पा रहा था। उसे इतना अवश्य याद था कि उन दोनों के बीच अब सलमा और सोलंकी की लाशें धरी थीं। अगर वह पाकिस्तान लौटा तो बलूच ने उसे हर...
by Major Krapal Verma | May 27, 2024 | राम चरण
ये अल्लाह की अलामत ही थी कि मुनीर खान जलाल जहन्नुम में से भाग जन्नत में पहुँच गया था। वह बहुमंजिला इमारत पर बैठा एक खुशगवार नजारे को देख रहा था। और खुश-खुश हो रहा था। कहीं दूर गगन के उस छोर पर नीला समुद्र उससे गले मिल रहा था। कुछ किश्तियां थीं और कुछ बड़े-छोटे पानी के...
by Major Krapal Verma | May 27, 2024 | राम चरण
जिंदगी में आज पहली बार था जब बलूच पूरी रात सो न पाया था। ब्रिगेडियर मुस्तफा को गहरी नींद में सोते देखता ही रहा था – बलूच। लेकिन क्या मजाल जो पलकें बंद हों तो वह भी सो कर देखे। लेकिन ये रात उसके लिए रात नहीं थी – एक अहसासों की बाढ़ थी जो उसे बहाए-बहाए बहाती...