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खानदान 98

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रमेश सफ़ारी गाड़ी को कहाँ छुपाना है.. लगातार अपना दिमाग़ लगाए जा रहा था। वैसे दर्शनाजी ने रमेश को सलाह तो दे ही दी थी.. कि सफ़ारी गाड़ी रंजना के घर में खड़ी कर दे.. इसी बात के थोड़े से मज़े सुनीता ने भी रमेश के लेते हुए.. उससे कहा था,” ठीक तो कह रहीं हैं.. अम्माजी! आप यह सफ़ारी गाड़ी रंजना के घर में ही क्यों नहीं खड़ी कर देते!”।

“ अरे! कहाँ है.. उधर जगह”।

रमेश ने रंजना के घर के लिये साफ़ मना करते हुए, कहा था। रंजना के घर सफ़ारी रखने का प्लान तो धरा का धरा ही रह गया था, पर रमा भी वहीं इंदौर की ही रहने वाली थी.. रमेश ने सोचा था, चलो! वहीं गाड़ी खड़ी कर आता हूँ.. और यह बात दर्शनाजी से हमेशा की तरह ऊँचे स्वर में पूछ बेठा था।

“ सुने ने! इस बिल्ली के घरां खड़ी कर दे.. गड्डी ने!”।

रमेश ने रमा के घर सफ़ारी को खड़ा करने की बात कही थी। लेकिन रमा माँ-बेटों की बात सुन रही थी.. और उनकी बात काटते हुए, बीच में ही बोली थी,” नहीं! नहीं! वहाँ नहीं! और कहीं खड़ी कर लेगा.. अपनी गाड़ी! पर वहाँ तो बिल्कुल भी नहीं”।

गाड़ी को छुपाने की जगह अब बाकी रमेश के दिमाग़ में कोई और नहीं आ रही थी। लेकिन एक नया आईडिया ज़रूर आ गया था.. गाड़ी को कबाड़े में बेचने की नई तरकीब।

“ इस गाड़ी को कबाड़े में निकाल देते हैं.. काम ख़त्म!”।

रमेश ने सुनीता को बताया था, और ख़ुद जल्दी-जल्दी गाड़ी के अंदर से सामान निकाल पूरी गाड़ी कबाड़े में बेचने के लिये तैयार कर दी थी। “ चलो! अब ठीक है.. आराम से दो लाख में कबाड़ी इस गाड़ी को ले लेगा!”। रमेश ने लम्बी और फुर्सत भरी साँस भरते हुए.. कहा था।

“ रमेश जी को बुलाइये!”।

अभी तो सफ़ारी गाड़ी को कबाड़े में बेचने की प्लानिंग ही हुई थी, कि अगले दिन रविवार था.. और पुलिस घर आ पहुँची थी, जिसकी रमेश ने कल्पना भी नहीं की थी। पुलिस वालों ने घर के चारों तरफ़ घूमकर घर का पूरा जायज़ा ले लिया था.. और रमेश को बुलाने के लिये कहा था.. रमेश को सुनीता ने ऊपर जाकर बता दिया था, घर में पुलिस आ गई है.. और उसी के बारे में पूछताछ कर रही है। रमेश पुलिस का नाम सुनकर घबरा गया था.. और सबसे ऊपर छत्त पर जाकर छुप गया था।

सफ़ारी गाड़ी का मसला अभी ख़त्म नहीं हुआ था। इस मामले में आगे क्या हुआ.. जानने के लिये जुड़े रहिये खानदान के साथ।