अकेला बैठा अविकार अनवरत बहती चंद्रप्रभा को देख रहा था – अपलक।
“यार अवि!” अचानक ही वह गंगू की आवाजें सुनने लगा था। “अगर तू भागने में सफल हो जाए .. और ..” उसने याचक निगाहों से अविकार को देखा था। “मुझे भी इस नरक से निकाल लेना .. प्लीज!” उसने प्रार्थना की थी।
था तो नरक ही वो पागलखाना! लेकिन जब जब गाइनो उसे मिलने आती थी तो न जाने कैसे वो स्वर्ग बन जाता था! उसे याद है कि किस तरह उसका मन मयूर गाइनो को देखते ही टेरने लगता था – अपने प्रेम की देवी को! प्रफुल्लित हो उठता था उसका तन मन!
“खाओ खाओ! मैं तुम्हारे लिए स्पेशल बना कर लाई हूँ, अवि!” गाइनो के उन अनमोल से आग्रहों को वह भूला कब था। “लो! मेरे हाथ से खाओ!” वह बड़े लाढ़ से आग्रह करती थी। “सच अवि! मैं तुम्हारे बिना चैन से सो भी नहीं सकती हूँ। इतने याद आते हो तुम कि ..” चुप हो कर गाइनो अपनी नीली गहरी आंखों में उसे बसाने लगती थी।
सब कुछ भूल जाता था वह उसे केवल गाइनो ही याद रहती थी।
“ये तुम्हारा अंकल अमरीश हमारे प्यार पर प्रश्न चिन्ह लगाता है!” गाइनो ने शिकायत की थी। “जब मैंने कहा था कि मैच आर मेड इन हैवन तो जानते हो इसने क्या कहा था?”
“क्या कहा था?”
“कहता है – मिस मैच आर मेड इन इंडिया!” गाइनो सीरियस थी। “क्या मैं तुम्हें पागल बना रही हूँ?” गाइनो ने कई पलों तक अविकार को देखा था। वह कुछ न बोला था। “लेकिन मैंने भी चुनौती ओट ली है, एंड वी आर गोइंग टू विन!” वह बता रही थी। “अगले हफ्ते कमिशन आ रहा है – वकीलों का कमीशन। तुम से मिलेगा और कोर्ट को बताएगा कि क्या तुम सचमुच में ही पागल हो! मेक नो मिस्टेक अवि! ठीक से पागलों की एक्टिंग करना। एक बार हमारा ये काम हो जाए तो फिर ..” तनिक हंसी थी गाइनो। “यू नो! द वी वील …!”
गाइनो अपने हुस्न का मोहिनी मंत्र मार कर खुश खुश लौट गई थी।
“ये साली फ्रॉड है! तुम्हारा उल्लू बना रही है!” गंगू जो कहीं से हमें देख रहा था पास आ कर बोला था। “काम बनते ही तुम्हें सड़क पर छोड़ देगी, सब समेटेगी और भाग जाएगी!”
मुझे गंगू पर क्रोध हो आया था। मैं आपा खो बैठना चाहता था। मैं चाहता था कि गंगू का मुंह तोड़ दूं!
“मेरे साथ भी तो यही हुआ है अवि!” गंगू फिर बोला था। “शोभा – मेरी पत्नी, जिसके लिए मैं जान तक दे देना चाहता था – चाल चल गई! सब चला गया! दोस्त – सब लुट गया!” भावुक हो आया था गंगू। “और जानते हो ये किया किसने? मेरे ही सगे भाई ने और साथ दिया मेरी ही भाभी ने! शोभा को बहका लिया। मुझे पागल बना कर यहां बिठा दिया। अब शोभा का बेटा है और भाई की ..” आंखें भर आई थीं गंगू की। “मुझे तुमसे कोई दुश्मनी नहीं है अवि, मैं तो इसलिए बोला हूँ कि ..”
बहुत देर तक वो दोनों चुप बैठे रहे थे – साथ साथ!
मेरा माथा घूमा था। अगर गाइनो सब कुछ ले कर उड़ गई तो .. तो मैं ही नहीं अंकल अमरीश भी बर्बाद हो जाएंगे! मैं तो इस जन्म के लिए पागल सिद्ध हो जाऊंगा और अंकल ..
“क्या करूं गंगू ..?” मैंने तड़प कर प्रश्न पूछा था।
“भाग जाओ!” गंगू ने सीधे सीधे कहा था। “कहीं वहां जाकर छुपो जहां ..” वह बताता रहा था।
उसी रात की तो बात है जब मैं सो नहीं पाया था। मुझे गाइनो बार बार आ कर गर्दन से पकड़ लेती थी और फिर ..
अंधकार था – चारों ओर! अंधकार ही अंधकार था! रात सो रही थी। लेकिन मैं जग रहा था। आज पहली बार मेरा दिमाग सजग हुआ था जब उसने उस गहन अंधकार के उस पार रास्ता खोज लिया था। मैं भटका भी था लेकिन मैंने खोज नहीं छोड़ा था।
अंधेरे में भी टटोलने से जीने की राह मिल जाती है – हंस रहा था अविकार!

मेजर कृपाल वर्मा