by Rachna Siwach | Jun 26, 2019 | Uncategorized
सुनीता के लाख समझाने पर भी घर में चिल्ला-चोट और हंगामा देख.. प्रहलाद ने दिल्ली जाने का फैसला ले लिया था.. ” मेरे पास थोड़े से पैसे हैं! मैं अपनी टिकट ख़ुद ही करवा कर दिल्ली चला जाऊँगा!”। प्रहलाद माँ के आगे बोला था। ” दिल्ली जाकर वहाँ नानी के घर क्या...
by Rachna Siwach | Jun 24, 2019 | Uncategorized
घर के बाहर बहुत ही बड़ा रेत का ढेर लगा हुआ था.. टीला सा बना हुआ था.. पड़ोस में मकान बनने वाला था.. उसी की तैयारी थी। रेत के ढेर पर बहुत दिनों से एक सूरी अपने नवजात शिशुओं को लिए लेटी रहती थी.. उस सूरी पर हम जब भी अपनी छत्त की आगे दीवार पर खड़े हुआ करते.. नज़र पड़ ही...
by Rachna Siwach | Jun 21, 2019 | Uncategorized
प्रहलाद का बैंगलोर दाखिला नहीं हो पाया था.. सुनीता और प्रह्लाद दाखिला न होने से बेहद निराश हो गए थे.. पर इस बात का रमेश पर कोई भी फ़र्क नहीं पड़ा था। एक तरह से रमेश प्रहलाद के दाखिला न होने की वजह से ख़ुश था.. सोच तो वही थी,” चलो! हिस्से के पैसे बच गए!”।...
by Rachna Siwach | Jun 19, 2019 | Uncategorized
“ये बात कैसे सबके सामने पहुँची..!! कि मेरे पास लाख रुपये आ गए हैं!”। रमेश बुरी तरह से चिल्ला कर बोला था। सब एकदम चुप हो गए थे.. किसी ने भी कोई जवाब नहीं दिया था। ” कोई बात ना.! यो पैसे रमेश ने धर लेन दे!”। माताजी ने बेटे के लिए. लाड़ दिखाते...
by Rachna Siwach | Jun 17, 2019 | Uncategorized
” मामले को ऐसे मत छोड़! प्रहलाद से कहकर थाने में कंप्लेंट दर्ज करवा.. कि इन्होंने बैंगलोर दाख़िले के पैसे नहीं दिए! प्रहलाद का भी हिस्सा बनता है.. वो थाने जाकर लिखित में शिकायत दर्ज करवा सकता है”। धीमे और निराशा भरे स्वर में मुकेशजी ने सुनीता से फ़ोन पर...
by Rachna Siwach | Jun 17, 2019 | Uncategorized
लोन की कहानी जैसे-तैसे सुनीता ने दबा ली थी.. दोनों मां-बेटा घर आ गए थे.. गाँव से भी बस लाख रुपये का ही इंतेज़ाम हो पाया था। प्रहलाद के फ़ीस के पैसे पूरे नहीं हो पाए थे.. साथी मित्रों के पिताओं ने जैसे-तैसे अपनी जमा-पूँजी से अपने बेटों के दाख़िले करा दिए थे। पर प्रहलाद...