by Rachna Siwach | Jul 13, 2019 | Uncategorized
ये सामान बेचकर बिसनेस का आईडिया रमेश की शादी के बाद ही शुरू हो गया था.. ” यो कूलर बेच की न ! दिल्ली गया था!”। दर्शनाजी ने सुनीता के आगे बताया था.. हालाँकि सीख तो उन्हीं की थी.. पर हिसाब तो शुरू से वही था.. ख़ुद ही कहना कि जा चोरी कर ले! और फ़िर...
by Akhileshwar Mishra | Jul 11, 2019 | Uncategorized
भरे हुए हैं शूरवीर यहाँ बस तू ही नहीं अकेला है जितने भी दिख रहे इंसान सबमें एक विजेता है लड़ी हुई है युद्ध सभी ने बाधाएँ सब ने झेली हैं कष्टों को सह के सभी ने जीत की होली खेली है अलग सभी का कौशल है सबकी अपनी रुचियाँ है रोहित बल्ले से बोला है तो बुमराह गेंद से गुर्राया...
by Surinder Kaur | Jul 11, 2019 | Uncategorized
गर तू ही इशक होने से मुकर गया होता।मेरे अन्दर का वो जख्म भर गया होता।चहकती फिरती मैं अल्हङ सा यौवन लेकररूप मेरा कुछ और निखर गया होता।गुब्बार कोई न होता फिर मेरे भी सीने में।मेरे अंदर का वो शख्स न मर गया होता।आवारा फिरती न यादें तेरी ज़ेहन में मेरेतू गर मुझ से किनारा...
by Rachna Siwach | Jul 11, 2019 | Uncategorized
” मेरे पास सिर्फ़ सौ रुपए हैं!”। यह डायलॉग रमेश ने सुनीता के ब्याह के तुरंत बाद ही बोल दिया था.. जब वह उसे पहली बार पगफेरे के बाद इंदौर ले जाने आया था.. उस वक्त इस डायलॉग का मतलब ही क्या हो सकता था.. भई! अच्छे खासे बिसनेस मैन थे.. रामलालजी! घर में...
by Rachna Siwach | Jul 9, 2019 | Uncategorized
बारिशें शुरू हो गई हैं..यहाँ भोपाल में सुहाने मौसम की शुरुआत हो चुकी है.. इसी सुहाने मौसम में हमारा जन्मदिन भी आता है। कल ही वो शुभ दिन था.. वैसे तो हम अपने जन्मदिन पर कुछ ख़ास करते नहीं हैं.. बस! परिवार के लिए अच्छा भोजन बनाया .. छुट्टी। पर कल हमारे जन्मदिन के उपलक्ष...
by Rachna Siwach | Jul 7, 2019 | Uncategorized
इस सुन्दर मौसम में कहीं दूर जाने का मन होता है! सिर्फ़ अपनों संग फिर से एक नया नगर बसाने का मन होता है। अपनी सी नगरी में अपने से नियम हों अपनी सी शामें हों अपने से सवेरे हों और सब अपने हमेशा के लिए संग में हों कभी भी न बछड़े एक दूसरे से फ़िर हम ऐसी नगरी बसाने का मन...