खानदान 161

खानदान 161

ये सामान बेचकर बिसनेस का आईडिया रमेश की शादी के बाद ही शुरू हो गया था.. ” यो कूलर बेच की न ! दिल्ली गया था!”। दर्शनाजी ने सुनीता के आगे बताया था.. हालाँकि सीख तो उन्हीं की थी.. पर हिसाब तो शुरू से वही था..  ख़ुद ही कहना कि जा चोरी कर ले! और फ़िर...

सबमें एक विजेता है

भरे हुए हैं शूरवीर यहाँ बस तू ही नहीं अकेला है जितने भी दिख रहे इंसान सबमें एक विजेता है लड़ी हुई है युद्ध सभी ने बाधाएँ सब ने झेली हैं कष्टों को सह के सभी ने जीत की होली खेली है अलग सभी का कौशल है सबकी अपनी रुचियाँ है रोहित बल्ले से बोला है तो बुमराह गेंद से गुर्राया...
जख्म भर गया होता

जख्म भर गया होता

गर तू ही इशक होने से मुकर गया होता।मेरे अन्दर का वो जख्म भर गया होता।चहकती फिरती मैं अल्हङ सा यौवन लेकररूप मेरा कुछ और निखर गया  होता।गुब्बार कोई न होता फिर मेरे भी सीने में।मेरे अंदर का वो शख्स न मर गया होता।आवारा फिरती न यादें तेरी ज़ेहन में मेरेतू गर मुझ से किनारा...
खानदान 161

खानदान 160

” मेरे पास सिर्फ़ सौ रुपए हैं!”। यह डायलॉग रमेश ने सुनीता के ब्याह के तुरंत बाद ही बोल दिया था.. जब वह उसे पहली बार पगफेरे के बाद इंदौर ले जाने आया था.. उस वक्त इस डायलॉग का मतलब ही क्या हो सकता था.. भई! अच्छे खासे बिसनेस मैन थे.. रामलालजी! घर में...
Article 15

Article 15

बारिशें शुरू हो गई हैं..यहाँ भोपाल में सुहाने मौसम की शुरुआत हो चुकी है.. इसी सुहाने मौसम में हमारा जन्मदिन भी आता है। कल ही वो शुभ दिन था.. वैसे तो हम अपने जन्मदिन पर कुछ ख़ास करते नहीं हैं.. बस! परिवार के लिए अच्छा भोजन बनाया .. छुट्टी। पर कल हमारे जन्मदिन के उपलक्ष...
मौसम

मौसम

इस सुन्दर मौसम में कहीं दूर जाने का मन होता है! सिर्फ़ अपनों संग फिर से एक नया नगर बसाने का मन होता है। अपनी सी नगरी में अपने से नियम हों अपनी सी शामें हों अपने से सवेरे हों और सब अपने हमेशा के लिए संग में हों कभी भी न बछड़े एक दूसरे से फ़िर हम ऐसी नगरी बसाने का मन...