by Major Krapal Verma | May 27, 2020 | Jail Ke Pannae
कहानी‘‘दुखों की और सुखों की मात्र एक विभाजन रेखा है ! इनका अंत नहीं आता …..!!’’ श्रवण श्रीवास्तव मुझे बता रहे थे . ‘‘अब ये भापे गर्रा रहा है ! किसी ने सामान चोरी कर लिया है . पर बुरी-बुरी गालियां बकने से ?’’ उसने मेरी ओर देखा है .‘‘ठंडा हो लेगा ! जेल है …!’’ मैं तनिक...
by Major Krapal Verma | Mar 31, 2020 | Jail Ke Pannae
प्यारे ये जेल है,सीखचों से बाहर झांकती जिन्दगी …रंग भरे सपनों को निहारती जिन्दगी ..बुहारती पाप-पुण्यों के पथ -बेजान बैठी जिन्दगी..अजीब ही एक खेल है,प्यारे ये जेल है। कतरे-कतरे कटते दिन से टपकता लहू …फूटते फफोलों के आर-पार से आती पीड़ा …यादों के...