by Major Krapal Verma | Dec 18, 2022 | जीने की राह!
शहर में पर्चे बंट रहे थे। पंद्रह तारीख सोमवार को अमरीश विला में कीर्तन का प्रोग्राम था। अमरपुर आश्रम के कुमार गंधर्व संकीर्तन की शोभा बढ़ाएंगे – बड़ी सूचना थी। सारे शहर में उल्लास और आनंद की लहरें हिलोरें ले रही थीं। भक्त लोग महा प्रसन्न थे। कुमार गंधर्व की...
by Major Krapal Verma | Dec 16, 2022 | जीने की राह!
“ए ग्रैजुएट फ्रॉम सेंट निकोलस लंदन – अविकार हो सकता था!” अमरीश ने स्वीकार में सर हिलाते हुए माना था। “और वनस्थली जयपुर में पढ़ी अंजली भी अविकार की अंजू हो सकती थी पापा!” “हां! हो सकती थी नहीं – है!” सरोज ने बात काटी थी।...
by Major Krapal Verma | Dec 13, 2022 | जीने की राह!
चंद्रप्रभा के माथे पर लगा बिंदिया सा चांद आसमान पर उगा खड़ा था। रात के शांत और नीरव पलों में कुमार गंधर्व और अंजली पास पास बैठे भिन्न भिन्न दिशाओं में सोच रहे थे। जहां कुमार गंधर्व ने अपनी मंजिल अंजली को पा लिया था वहीं अंजली अब तक अविकार को हासिल करने में कामयाब नहीं...
by Major Krapal Verma | Dec 11, 2022 | जीने की राह!
शनिवार की सुबह थी और कुमार गंधर्व की आंखें खुलते ही अंजली को तलाशने लगी थीं। अंजली जैसे एक खोया सपना थी, जैसे कोई बिछुड़ गया मीत थी और जैसे कोई भूली याद थी – कुमार गंधर्व उसे रह रह कर पुकार रहा था। “क्या सुनाऊं आज?” अचानक कुमार गंधर्व ने स्वयं से...
by Major Krapal Verma | Dec 9, 2022 | जीने की राह!
“कुमार गंधर्व की गायकी कैसी लगी?” अमरीश ने चलती गाड़ी में प्रश्न पूछा था। अंजली ही कार चला रही थी और वो दोनों पीछे बैठे थे। “कनसुरा हो जाता है पापा!” अंजली ने उत्तर दिया था। “गुरु ने संपूर्ण ज्ञान नहीं दिया है।” उसकी राय थी।...
by Major Krapal Verma | Dec 6, 2022 | जीने की राह!
अविकार को नींद नहीं आ रही थी। आज नंगी जमीन उसके बदन में चुभ रही थी। आज फिर पत्तल पर जमीन पर बैठ कर खाना उसे खला था। आज वो कुमार गंधर्व न रह कर अविकार था – अजय अवस्थी का इकलौता बेटा – अविकार! वही अविकार जिसे कभी ताती बयार ने छूआ तक नहीं था। वही अविकार जिसकी...