by Major Krapal Verma | Jan 5, 2023 | जीने की राह!
“सेंट निकोलस और अमरपुर आश्रम हम दोनों के साथ-साथ के सहयोग से अवस्थी इंटरनेशनल की नई नींव डालेंगे, अंजू!” अविकार ने अपने जेहन में बहते विचारों का खुलासा किया था। “मेरे लिहाज से न पूरब गलत है न पश्चिम! सूरज तो दोनों का है।” वह मुसकुराया था।...
by Major Krapal Verma | Jan 2, 2023 | जीने की राह!
अमरीश और सरोज अविकार और अंजली की शादी के बाद अब अमरपुर आश्रम जा रहे थे। उन्होंने वानप्रस्थ स्वीकार कर लिया था। वंशी बाबू की भक्त मंडली उन्हें आश्रम ले जाने के लिए अमरीश विला पहुंची हुई थी। उनके इस गृहस्थ जीवन के परित्याग को एक उत्सव की तरह मनाया जा रहा था! “सब...
by Major Krapal Verma | Dec 30, 2022 | जीने की राह!
आज की खबर से पूरा शहर शर्मसार हुआ लगा था। अमरीश की बेगुनाही ने पूरे समाज को गुनहगार सिद्ध कर दिया था। लोग स्वयं में शर्मिंदा थे। प्रेस और मीडिया के ऊपर भी मनों मिट्टी पड़ी थी। क्या कुछ नहीं लिख बैठे थे – खोजी पत्रकार और चतुर ऐडीटर। किस तरह एक भयंकर गुनाह होने से...
by Major Krapal Verma | Dec 28, 2022 | जीने की राह!
शाम ढलते न ढलते कीर्तन का आरंभ हो चुका था। पूरा शहर उमड़ आया था। समाज के गण मान्य व्यक्ति भी पधारे थे। परमेश्वर की आराधना में सब ने सहयोग दिया था। पहले तो मंच पर छोटे मोटे गायक और भजनानंदियों ने उत्सव की शोभा बढ़ाई थी। लेकिन जब कुमार गंधर्व ने सुर साधे थे तो पूरी...
by Major Krapal Verma | Dec 26, 2022 | जीने की राह!
सारा शहर भक्ति रस में डूबा-डूबा लग रहा था। न जाने क्या जादू चला था कि लोगों के मन में स्वतः ही भक्ति भाव का प्रादुर्भाव हुआ था और उन्हें परमेश्वर की महिमा का आभास हुआ था। अमरीश विला को आश्रम से वंशी बाबू और उनके सहयोगियों ने आ कर खूब सजाया था और भक्तों के स्वागत हेतु...
by Major Krapal Verma | Dec 24, 2022 | जीने की राह!
दूर दृष्टि के छोर पर जब वो लंबी चौड़ी कार आ कर रुकी थी तो कुमार गंधर्व का मन त्राहि-त्राहि कर उठा था। शनिवार था। कीर्तन होना था। अंजली आ चुकी थी। इसके सिवा कुमार गंधर्व को जैसे और कुछ दरकार ही न था। उसका मन प्राण खिल उठा था। एक पुलक भर गया था – शरीर में। अंजली...