जीने की राह एक सौ छह

जीने की राह एक सौ छह

मंजू के पास जो खबर उड़ कर आई थी उसे सुनकर वो स्वयं दहला उठी थी। सरोज सेठानी शैतान थी – मंजू को अब विश्वास होने लगा था। जो सादगी और सेवा का चोला उसने आश्रम में आ कर ओढ़ लिया था – मिथ्या था। आश्रम को लील लेगी सेठानी मंजू को अब जँच गया था। “गुलाबी का...
जीने की राह एक सौ छह

जीने की राह एक सौ पांच

आश्रम में चलती गहमागहमी से कोई भी अनुमान लगा सकता था कि आज शनिवार था। आज कल अविकार और अंजली ने एक नया भक्ति मार्ग खोज लिया था। दोनों राधे-कृष्ण के अवतार बने हुए थे। दोनों साथ-साथ गाते थे। भजनों का प्रसंग राधे-कृष्ण की प्रेम लीलाएं होती थीं। संगीत के साथ प्रेम कथाएं जब...
जीने की राह एक सौ छह

जीने की राह एक सौ चार

रात गहराती जा रही थी लेकिन आश्रम का जर्रा-जर्रा आज जाग रहा था। उनके श्रद्धेय स्वामी जी – पीतांबर दास सुबह आश्रम छोड़ कर चले जाएंगे – ये गम हर आश्रम वासी को सता रहा था। नारी निकेतन में कोहराम मचा था – जबकि स्वामी जी की कुटिया नितांत खामोशी में डूबी...
जीने की राह एक सौ छह

जीने की राह एक सौ तीन

स्वामी पीतांबर दास सामने खड़ी गुलाबी को अपांग देखते रहे थे। गुलाबी सुंदर थी – बहुत सुंदर। गुलाबी गुलनार से भी इक्कीस थी। गुलाबी की आंखों में एक अलग चमक थी। कुछ ऐसा था – जो घट गया था और उसने गुलाबी को उद्दंड बना दिया था। गुलाबी और गुलनार .. हां हां! स्वामी...
जीने की राह एक सौ छह

जीने की राह एक सौ दो

“निकाल बाहर करो इसे आश्रम से!” श्री राम शास्त्री ने स्पष्ट कहा था। उन्हें अचानक ही अपने बेटे की बहू याद हो आई थी। उनका क्रोध उबाल पर था। “इस तरह की औरतें कलंकित करती हैं समाज को!” उनका कहना था। “लेकिन जाएगी कहां?” सेठानी सरोज का...
जीने की राह एक सौ छह

जीने की राह एक सौ एक

“सेठ हैं तो अपने घर रहें! यहां आश्रम में क्या लेने आए हैं?” गुलाबी ने अपना मुंह सा खोल दिया था। उसे सेठानी सरोज फूटी आंख भी नहीं सुहाती थी। गुलाबी का अदल सरोज के आने से जाता रहा था। “बनिए हैं!” गुलाबी गरजी थी। “लोग लुगाई दोनों हैं! खरीद...