जीने की राह एक सौ बारह

जीने की राह एक सौ बारह

“एक नजर के बाद फिर क्यों नहीं दिखे स्वामी जी?” गुलनार का मन बार बार इसी एक प्रश्न को पूछे जा रहा था। “आए क्यों नहीं? लौटे क्यों नहीं?” वह कारण जान लेना चाहती थी। “कहीं ऐसा तो नहीं कि ..” गुलनार डर रही थी। वह तो उजागर होना ही न चाहती...
जीने की राह एक सौ बारह

जीने की राह एक सौ ग्यारह

जहां आश्रम श्रावणी के उत्सव की उमंगों से चहक रहा था वहीं गुलाबी और मंजू की एक मीटिंग के बाद दूसरी मीटिंग चल रही थी। मंजू और गुलाबी ने मिल कर नारी निकेतन की सभी महिलाओं को पुनः विश्वास दिला दिया था कि सरोज सेठानी ने आश्रम को खरीद लिया था। वंशी बाबू अब उनके नौकर थे। और...
जीने की राह एक सौ बारह

जीने की राह एक सौ दस

“ओ मइया!” जैसे ही श्रावणी मां उदय हुई थी मंजू की आह निकल गई थी। “इसे सजा दिया ..?” उसने आश्चर्य जताया था। “मरने मरने को थी जब आई थी। बचा लिया था स्वामी जी ने।” गुलाबी को याद आ रहा था। “अब तो गलुए लाल हो गए हैं, दारी के! देख तो...
जीने की राह एक सौ बारह

जीने की राह एक सौ नौ

शंकर ने आ कर स्वामी जी से जब कपड़े बदलने का आग्रह किया था तो उन्हें याद हो आया था कि आज सोमवार था और उन्हें नारी निकेतन जाना था। अमरपुर आश्रम के ऊपर शाम ढल रही थी और सूर्य देव अस्ताचल की ओर जा रहे थे। अचानक स्वामी जी ने निगाहें उठा कर समूचे दृश्य को देखा था। नारी...
जीने की राह एक सौ बारह

जीने की राह एक सौ आठ

प्रभु जी मेरे अवगुण चित्त न धरो – गुलाबी मंद-मंद स्वर में स्वयं के लिए गा रही थी। वह आनंद विभोर थी। शनिवार की कीर्तन सभा में अंजली द्वारा गाया भजन और अविकार का दिया साथ उसे बेहद रुचिकर लगा था। आज सोमवार था। बड़ा ही महत्वपूर्ण दिन था। करवा चौथ का उत्सव आज शाम से...
जीने की राह एक सौ बारह

जीने की राह एक सौ सात

अमरपुर आश्रम सुर्खियों में छाया हुआ था। सबसे ज्यादा चर्चा में स्वामी पीतांबर दास थे। उनका मात्र आशीर्वाद देना और लोगों को दुसाध्य रोगों से और असाध्य मानसिक तनावों से छुटकारा मिलना ही सबसे बड़ा चर्चा का विषय था। श्री राम शास्त्री द्वारा संस्कृत महाविद्यालयों की स्थापना...