by Major Krapal Verma | May 7, 2023 | जीने की राह!
आज अमरपुर आश्रम पूरे तरह से गुलाबी गेंग के अधीन था। गुलाबी के चलते ऐलानों और फरमानों को वंशी बाबू रोक नहीं पा रहे थे। गुलाबी ने चालाकी से उनका नाम गुलनार के साथ जोड़ दिया था। तरह तरह के चर्चे थे – उनके और गुलनार के जो आश्रम के आर पार आ जा रहे थे। गुलनार को अजब...
by Major Krapal Verma | May 2, 2023 | जीने की राह!
“नहीं, नहीं, नहीं!” वंशी बाबू पागलों की तरह चीख रहे थे। “इस बार मैं मैदान छोड़कर नहीं भागूंगा!” वो शपथ ले रहे थे। “भाग जाएं सब! भाग जाए शास्त्री! वंशी नहीं भागेगा!” उनका एलान था। “मैं अमरपुर आश्रम की आन, बान और शान को मिटने न...
by Major Krapal Verma | Apr 26, 2023 | जीने की राह!
लोगों की तलाशी में कुछ न मिला था। लेकिन हार तो चोरी हुआ था – यह आम प्रश्न था। सामान की तलाशी आरंभ हुई थी। किसी के पास कोई खास माल असबाब तो था नहीं। वही कुछ पहनने के कपड़े और साबुन तेल, झोलों, पन्नियों और अलमारी-तिखालों में संजो कर रक्खा था। कहीं कोई ताला कूची था...
by Major Krapal Verma | Apr 23, 2023 | जीने की राह!
अमरीश जी और उनके परिवार के जाने के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ था। “ये कौन सा अनिष्ट घुस आया था आश्रम में?” स्वामी पीतांबर दास समझ ही न पा रहे थे। अनायास ही उन्हें याद हो आया था – पिताजी का दूसरा विवाह और घर में कानी का प्रवेश। कानी का त्रिया चरित्र...
by Major Krapal Verma | Apr 21, 2023 | जीने की राह!
अंजली का कीमती हीरों का हार चोरी हो गया था। आग की लपटों की तरह खबर पूरे आश्रम में फैल गई थी। कयास लगाए जा रहे थे कि चोरी की किसने होगी। चोरी की पहली घटना थी आश्रम में। वहां सभी भूखे नंगे थे तो किसी का क्या चुराता? लेकिन अंजली तो आगंतुक थी और उत्सव में सजधज कर करवा चौथ...
by Major Krapal Verma | Apr 17, 2023 | जीने की राह!
शनिवार की शाम थी। उत्सव अपने उत्कर्ष पर था। परम सुंदरी गुलनार के हुस्न को स्वामी जी की निगाहों ने घूंट-घूंट कर पिया था। मन था कि गुलनार के प्रेम सागर में डूब-डूब कर नहाया था। इतने अंतराल के बाद भी स्वामी जी को लगा था कि वो कुछ भी नहीं भूले थे। गुलनार से लिपट-लिपट कर...