जीने की राह अट्ठावन

जीने की राह अट्ठावन

“आओ भक्त राज!” अविकार आया था तो मैंने उसे नए नाम से पुकारा था। “आप भी .. स्वामी जी ..” तनिक अधीर हो आया था अविकार। “सभी तो मेरा मजाक उड़ाते हैं। भक्त राज कह कर हंसते हैं!” अविकार शिकायत करने लगा था। “मुझे तो भक्ति के मतलब तक...
जीने की राह अट्ठावन

जीने की राह सत्तावन

“ये पागल ही है स्वामी जी!” शंकर मुझे अविकार के बारे में बताने लगा था। “कीर्तन में जब सब आनंद विभोर होकर झूमने लगते हैं ये लट्ठा बना बैठा रहता है।” शंकर ने मुझे पलट कर देखा है। “भगा दो इसे आश्रम से!” उसने अपनी राय दी है। “कहीं...
जीने की राह अट्ठावन

जीने की राह छप्पन

“मैं गाइनो के हाथ की कठपुतली बन गया था स्वामी जी!” अविकार बताने लगा था। मुझे मासूम अविकार एक औरत के मक्कड़ जाल में फंसा मच्छर लगा था जो न जाने कैसे अपनी जान बचा कर भाग निकला था और आश्रम में आकर छुप गया था। “अब हमें बड़ी होशियारी से काम लेना होगा,...
जीने की राह अट्ठावन

जीने की राह पचपन

काफी दिन के बाद लौटी थी एक दिन – गाइनो ग्रीन! “भूल गए?” आते ही उसने प्रश्न किया था। “लेकिन हम नहीं भूल पाए – सो चले आए!” वह खिलखिला कर हंसी थी। उसका चेहरा मोहरा दमक रहा था। उसके सफेद दांत बड़े ही मोहक लगे थे मुझे। मुझे वो रात फिर से...
जीने की राह अट्ठावन

जीने की राह चौवन

“स्वामी जी!” वंशी बाबू बोले हैं। उनके हाथ में एक चिट्ठी लगी है। “अविकार साहब का पत्र है!” वंशी बाबू हंसे हैं। “हर साल की तरह श्रावणी पर परिवार सहित पधार रहे हैं। बेटे का जन्म दिन भी यहीं मनाएंगे और एक सप्ताह तक ..” “अच्छा...
जीने की राह अट्ठावन

जीने की राह तिरेपन

ये एक कितना सुखद आश्चर्य है कि मैं और गुलनार फिर से आ मिले हैं! हम पति-पत्नी हैं लेकिन आश्रम में हम दो अजनबी की तरह रह रहे हैं। हम एक दूसरे को जानते हैं लेकिन हमें और कोई नहीं जानता। यादें हैं – यादें ही यादें हैं – अनगिनत यादें हैं और वो आत्मीय पल भी हैं...