by Major Krapal Verma | Nov 7, 2022 | जीने की राह!
“लुक एट माई लक!” गाइनो बार में बैठी अपनी किस्मत की कहानी दोस्तों को सुना रही थी। “आई बम्पड इनटू ए फारचून एक्सीडेंटली! हाहाहा!” वह जोरों से हंसी थी। “टू डेट्स मोर एंड आई विल गेट मिलियंस एंड मिलियंस!” उसने घोषणा की थी। जमा दोस्तों को...
by Major Krapal Verma | Nov 1, 2022 | जीने की राह!
अकेले बैठे अविकार को आज न जाने क्यों गंगू बहुत याद आ रहा था। “अगर तू सफल हो जाए अविकार तो मुझे भी इस नरक से बाहर निकाल लेना।” गंगू की याचक आवाजें अविकार सुनने लगा था। “भाग जा! जैसे तैसे – कैसे भी हो दोस्त, भाग जा! वरना तो मेरी तरह तुझे भी ये...
by Major Krapal Verma | Oct 30, 2022 | जीने की राह!
अमरीश अकेला बैठा बैठा अपने उन भले दिनों को याद कर रहा था जब वो और अजय बुलंदियों पर थे और अवस्थि इंटरनेशनल ने व्यापार जगत में तहलका मचा दिया था। दोनों की दोस्ती की चर्चाएं थीं। दोनों बड़े ही कर्मठ और दूरदर्शी थे। दोनों ने नौकरियां छोड़ कर अपना व्यापार बनाया था और नाम...
by Major Krapal Verma | Oct 17, 2022 | जीने की राह!
गाइनो ग्रीन ने अमरीश को एक विलेन बना कर दुनिया जहान के सामने खड़ा कर दिया था। जब से अविकार पागलखाने से भागा था – गाइनो ने अमरीश को ही पकड़ा था। उसने सीधा सीधा इल्जाम अमरीश पर लगाया था कि उसी ने अविकार को पागलखाने से किडनेप कराया था और अब पुलिस उसका पता लगा कर...
by Major Krapal Verma | Oct 10, 2022 | जीने की राह!
चंद्रप्रभा के साथ अविकार का अनूठा नाता जुड़ गया था। अपने पुनर्जन्म के लिए वह चंद्रप्रभा का आभारी था। “कभी लौटोगे कि नहीं ..?” अचानक अविकार ने महसूसा था कि चंद्रप्रभा के उस किनारे पर खड़ा सेंट निकोलस प्रश्न पूछ रहा था। उसके हाथ में हंटर था। अविकार को अपना...
by Major Krapal Verma | Oct 7, 2022 | जीने की राह!
“शोभा मेरे मामा की लड़की थी। हम उम्र थी। हम साथ साथ कालेज में पढ़े थे और खूब लड़े थे। मामा की तीन बेटियां थीं – बेटा नहीं था। मामा की हालत खस्ता थी। पी पा कर मामा मस्त रहते थे। पापा ही थे जो उनके घर बार का खर्चा चलाते थे।” गंगू अविकार को पागलखाने के...