by Major Krapal Verma | Dec 3, 2022 | जीने की राह!
अमरीश की बीमारी लाइलाज थी – ये खबर आग की तरह फैली थी। हर किसी ने एक ही बात बोली थी – पाप का घड़ा भर गया है। शनिवार था। अमरीश परिवार के साथ अमरपुर आश्रम जा रहे थे। अंजली कार चला रही थी और सरोज बीमार अमरीश को लिए पिछली सीट पर बैठी थी। कार का ड्राइवर साथ नहीं...
by Major Krapal Verma | Nov 27, 2022 | जीने की राह!
सीनियर एडवोकेट मिस्टर रोशन के चैंबर में गुदगुदे गद्देदार सोफों पर आराम से बैठी गाइनो असहज थी! “मुझे जल्दी है मिस्टर रोशन!” गाइनो का उलाहना था। “आई कांट वेट!” वह कह रही थी। “अगर इसी तरह डेट्स मिलती रहीं तो ..” “आप हमारे ऊपर...
by Major Krapal Verma | Nov 24, 2022 | जीने की राह!
“हाजिरी माफी की एप्लीकेशन लगा रहा हूँ योर ऑनर!” अमरीश का वकील आग्रह कर रहा था। “ही इज सीरियसली इल!” “झूठ बोल रहे हैं वकील साहब!” गाइनो का वकील गरजा था। “अमरपुर आश्रम में किस लिए गए!” उसका प्रश्न था। “डॉक्टर ने जवाब...
by Major Krapal Verma | Nov 18, 2022 | जीने की राह!
अमरपुर जाती बस यात्रियों से खचाखच भरी थी। उद्योगपति अमरीश को बस के एक कोने में आधी सीट मुश्किल से मोहिया हुई थी। आज वो राजा नहीं रंक की भूमिका में थे। चुपचाप बस में बैठ वह आश्रम पहुंचना चाहते थे ताकि लोगों को खबर न लग जाए कि एक असफल हुआ विख्यात व्यक्ति किसी मामूली से...
by Major Krapal Verma | Nov 11, 2022 | जीने की राह!
अमरीश के संकट गहराते चले जा रहे थे। लगता था कि गाइनो ग्रीन उससे अवस्थी इंटरनेशनल ले कर रहेगी। विचित्र संयोग था। गाइनो ग्रीन कौन थी, कहां से आई थी और अविकार कैसे उसके चंगुल में फसा कोई नहीं जानता! लेकिन मीडिया गाइनो के पक्ष में था। यहां तक कि फर्म के लोगों में भी नई...
by Major Krapal Verma | Nov 9, 2022 | जीने की राह!
“हर रूह ईश्वर से निकलती है और ईश्वर में ही मिलती है! जन्म के बाद मृत्यु ही सच और शाश्वत है। बाकी सब तो कर्म और अकर्म में बह जाता है। आता है – चला जाता है। लेकिन संगीत एक ऐसा सत्य है जो स्वयं स्फूर्त है, अमर और अविनाशी है – परमात्मा की तरह!”...