अखबारों में खबर छपी थी – मोहन मकीन बीमार अमेरिकन खरब पति की बेटी विभूति मकीन जन कल्याण आश्रम का निर्माण हिरन गोठी बंबई के परिसर में करा रही हैं। निर्माण के लिए टीम अमेरिका से आई है। निर्माण अनोखा होगा।

उद्घाटन के लिए सी एम साहब से निवेदन किया गया है। उनका स्वागत कुमारी विभूति स्वयं करेंगी। देश विदेश से लोग पधारेंगे। और माधव मोची भी सनातन का सम्मान करेंगे और स्वयं भी सनातन की सेवा में समर्पित होंगे।

बड़ी खबर है कि अचेत पड़े अरब पति मोहन मकीन की चेतना लौट आई है। यह चमत्कार स्वामी अनेकानंद की मात्र दृष्टिपात से हुआ है।

उद्घाटन से पहले प्रेस वार्ता का प्रस्ताव पहुंच गया है।

“तिल का पहाड़ बनाना प्रेस को खूब आता है।” राम लाल होती गुप्त मीटिंग में स्वामी अनेकानंद को बता रहा था। “तुम कल्लू स्वामी जी के साथ बने रहना।” राम लाल ने हिदायत दी थी। “अंट शंट सवाल नहीं आने चाहिए, ध्यान रखना।” राम लाल ने हिदायत दी थी। “और तुम – कदम प्रेस वालों की खातिर में जुट जाना। ये लोग सनकी होते हैं। कहो तो चाय पर ही बात बिगाड़ दें।” राम लाल तनिक हंसा था। “और आप स्वामी जी इन प्रेस वालों को हलके में न लेना।” राम लाल ने अनेकानंद को आंखों में देखा था। “जो कहना है – संक्षेप में। और जो नहीं आता – नहीं आता। आप ने नपा तुला बोलना है।”

पहली बार ही था कि स्वामी अनेकानंद खबरदार हुए लगे थे। ख्याति बढ़ने के साथ-साथ गिरने का खतरा भी बढ़ जाता है – उन्होंने पहली बार महसूसा था।

“स्वामी जी। आप ने मात्र दृष्टि से अचेत पड़े खरब पति मोहन मकीन को कैसे जगा दिया?” प्रेस का पहला ही प्रश्न था।

“बॉडी लेंग्वेज का माध्यम सही और सटीक होता है।” स्वामी जी ने उत्तर दिया था। “मैं बेशक न बोलूं पर अगर आपके सामने खड़ा हूँ तो भी संदेश आते जाते रहेंगे। मैं जो कहूंगा आप सुनेंगे और जो आप कहेंगे मैं समझूंगा।”

जमा लोग मंत्र मुग्ध हुए खड़े थे। स्वामी अनेकानंद एक नई बात जो बता रहे थे।

“मुझे देख कर मोहन मकीन ने अपनी व्यथा बताई थी। अथाह धन संचय के सागर में वो डूब गए थे। मुझे बचाओ – ये उनका आग्रह था।”

“आपने कैसे बचाया?” प्रेस का प्रश्न आया था।

“शांति! मैंने उन्हें मंत्र दिया था।”

“इसका अर्थ क्या हुआ?” प्रश्न लौटा था।

“भय, लालच और चिंता से मुक्ति।” स्वामी जी ने बताया था। “इससे दिमाग का बिगड़ा संतुलन लौट आता है।” स्वामी जी ने आगे कहा था। “जीने के लिए एक शांत और संतुलित मस्तिष्क का होना अनिवार्य होता है। और धन केवल विचारों और मूल्यों से नहीं बनता। इसके लिए कर्म यानि कि ठोस हाथ आवश्यक हैं। अथर्व वेद कहता है – शत हस्त समाहर – सहस्त्र हस्त संकिर। यानि सौ हाथों से कमाओ और हजार हाथों से दान करो।” स्वामी जी ने जमा प्रेस को एक साथ देखा था। “वही दान आश्रम के निर्माण रूप में होगा, तो मोहन मकीन साहब बंधन मुक्त हो जाएंगे।” तनिक मुसकुराए थे स्वामी अनेकानंद।

“सत्य वचन स्वामी जी।” प्रेस की ओर से उत्तर आया था।

प्रेस वार्ता अखबारों में छपी थी। स्वामी अनेकानंद का लार्जर देन लाइफ फोटो हर अखबार के प्रथम पृष्ठ पर छपा था। धन संग्रह और धनोपयोग के विज्ञान की व्याख्या बड़े ही मार्मिक ढंग से अखबारों में छपी थी।

बर्फी घंटों तक अखबार में छपे स्वामी अनेकानंद के फोटो को देखती ही रही थी।

हिरन गोठी के लंबे चौड़े विस्तारों में आज पैर रखने के लिए जमीन न बची थी।

अपार जन सैलाब इकट्ठा हुआ था। सी एम का भी पूरा काफिला पधारा था। अमेरिका से मोहन मकीन की पूरी टीम पहुंची थी। बनने वाली जन कल्याण आश्रम की बिल्डिंग का एक स्कैच बन कर लंबे चौड़े खम्बों पर टंगा हुआ था। लोग लौट-लौट कर इस स्कैच को देख रहे थे। यह स्कैच मोहन मकीन ने ही तैयार किया था – ऐसा बताया जा रहा था।

पंडित अवध नारायण ने पूजा अर्चना की मुकम्मल व्यवस्था की थी। बिल्डिंग की नींव में चुने जाने वाली पहली ईंट को मंत्रोच्चार से शुद्ध कर कलाबों में बांधा हुआ था। कुमारी विभूति का आसन हवन कुंड के ठीक सामने था। उसके उपरांत माधव मोची की गद्दी थी। सी एम साहब का आसन अलग था। विदेशी मेहमानों के बैठने का बंदोबस्त स्टेज बना कर किया था शहर के गण मान्य और विशिष्ट लोगों के लिए अलग से एक व्यवस्था की गई थी। कुल मिला कर एक मुकम्मल बंदोबस्त को अंजाम दिया गया था।

स्वामी अनेकानंद के दर्शन लाभ के लिए खुली व्यवस्था थी ताकि लोग आसानी से उनके दर्शन करें और आशीर्वाद ग्रहण करें।

कल्लू ने माधव मोची की पार्टी का एक नया रूप स्वरूप जनता के सामने रक्खा था। सभी कार्य कर्ताओं ने सनातनी वेश बनाया हुआ था। माधव मोची सनातनी लिबास में खूब जंच रहा था। पार्टी के कार्यकर्ताओं में एक नया जोश दिखा था।

सी एम का काफिला पधारा था तो प्रेस और अखबारों के संवाद दाता टूट पड़े थे।

जन कल्याण आश्रम की नई बनने वाली बिल्डिंग की नींव में अब कुमारी विभूति मकीन पहली ईंट रख रही थीं। जोरों की तालियां बजी थीं। सनातन के लोगों ने शंखनाद किया था और भारत माता की जय के नारे लगाए थे।

सी एम साहब टंगे जन कल्याण आश्रम की बिल्डिंग के स्कैच को लंबे पलों तक देखते रहे थे।

“वास्तव में ही एक विचित्र बिल्डिंग बन कर तैयार होगी।” सी एम साहब ने माना था। “अब देश का पुनः उद्धार होगा। अवश्य होगा।” कहते हुए वो मुसकुराए थे।

“सनातन के बारे आप क्या कहते हैं?” प्रेस रिपोर्टर का प्रश्न आया था।

“कहने को है क्या?” सी एम साहब हंस गए थे। “सनातन तो सर्व विदित है।” उनका कहना था। “कौन नहीं जुड़ा है सनातन से।” उन्होंने पूरे प्रेस से पूछ लिया था।

कुमारी विभूति सी एम साहब के सामने प्रस्तुत हुई थीं।

“प्रसाद है आपके लिए।” विभूति ने सी एम साहब को प्रसाद का पैकेट पकड़ाया था।

“धन्यवाद।” सी एम साहब ने विहंस कर कहा था। “अब कैसे हैं मोहन साहब?” उन्होंने पूछा था।

कई पलों तक चुप बनी रही थी विभूति। उसकी आंखें भर आई थीं।

“उम्मीद है … अब तो …” कांपते होंठों से विभूति ने कहा था। “एहसान मानती हूँ आप सब का।” विभूति रो पड़ी थी।

“स्वामी जी का चमत्कार है।” बगल में खड़े माधव मोची बोले थे।

“अरे हां। स्वामी जी के दरस परस तो हम करना ही भूल गए।” सी एम साहब चहके थे। “चलो भाई। हम भी मिलते हैं स्वामी जी से।”

सी एम साहब का काफिला अब स्वामी अनेकानंद के दर्शन लाभ में लगा था।

“आप जैसे संतों ने भारत का नाम ऊंचा किया है।” सी एम साहब कह रहे थे। “अब तो लोग लौट-लौट कर अमेरिका से भारत आ रहे हैं।”

“अभी तो शुरु हुआ है श्रीमान।” कल्लू ने उच्च स्वर में कहा था। “अब हम इस देश को दुनिया को दिखाएंगे।” कल्लू ने नारा जैसा दिया था। “सनातन का जलवा तो अगले चुनाव में देखेंगे श्रीमान।”

माधव मोची जिंदाबाद के नारे लगे थे।

माधव मोची को जंच गया था कि इस बार भी कल्लू ने चुनाव जरूर जीत लेना है।

Major krapal verma

मेजर कृपाल वर्मा रिटायर्ड

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