“काश! मेरे हाथ में अगर पिस्तैल हाेती ताे मैं उस साले हंच बैक बास्टर्ड हाकिम साहब काे इतनी गाेलियां मारता – इतनी कि ..” मूडी पूरे राेष में तना हुआ था। वह लैरी काे दिल्ली में हुई घटना का जायजा दे रहा था।
“हुआ क्या?” लैरी ने धीमे से पूछा था। लैरी तनिक उदास था। उसे मूडी से बड़ी-बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन मूडी का याें दिल्ली से खाली हाथ लाैटना लैरी काे बुरा लगा था।
“मैं जालिम के ठिकाने में झांकने चला गया था।” मूडी बताने लगा था। “मैं चाहता था कि ठिकाने काे देख कर अंदाज लगा लूं कि जालिम काे कैसे ट्रैप किया जाए। ये हंच बैक न जाने कहां से चला आया। लगा मुझ पर चिल्लाने।”
“निकलाे, निकलाे। बाहर हाे जाऒ हाेटल से।” हाकिम साहब ने ऐलान किया था। “भगाऒ इन्हें यहां से।” उसने अपने चमचाें काे आदेश दिया था।
“गलती हाे गई मुझसे – यू मिस्टर ..” मैंने उसे समझाना चाहा था।
“गलती नहीं है – ये जासूसी है।”
“मैं .. मैं तुम्हें जासूस दिखता हूँ क्या?”
“हां-हां जासूस ही हाे।” वह बाेला था। “भागाे यहां से वरना मैं पुलिस बुलाता हूँ।”
मूडी चुप हाे गया था। लैरी ने समझ लिया था कि हाकिम साहब काे जरूर ही मूडी पर शक हाे गया था।
“फिर क्या हुआ?” लैरी पूरी बात समझ लेना चाहता था।
“मैं दिल्ली से भाग हैदराबाद पहुँच गया था।”
“मिलाप हुआ था गुलाम अली से?”
“हां। वाे घर पर ही मिल गया था मुझे। मैंने उससे औरताें की खरीद फराेख्त के बारे में पूछा था। बाेला – लाए हाे माल? मैं सकते में आ गया था। मेरे पास औरत कहां थी जाे उसे दिखाता।”
मूडी बहुत परेशान था।
“उसने और क्या-क्या कहा?” लैरी मामले की तह तक पहुँच जाना चाहता था।
“कुछ नहीं। उसने तुरंत कहा था – यहाँ क्या बैंगन लेने आए हाे?” मूडी अब घबराया हुआ था। “लेकिन मैं उससे लड़ा नहीं। मैंने कहा – माल ले कर लाैटता हूँ।”
“गुड। ये ठीक कहा तुमने मूडी।” लैरी ने उसे धीरज बंधाया था। “अब ..?”
“अब औरत कहां से लाउंगा?” मूडी का स्वर कठाेर था। “मैं कहां से लाऊं औरत?” मूडी ने हथियार डाल दिए थे।
“डाेंट वरी। रिलैक्स मूडी।” लैरी ने प्रसंग ही बदल दिया था।
स्काई लार्क में सनसनी फैल गई थी। मूडी का याें खाली हाथ लाैटना किसी काे भी अच्छा न लगा था।
“मैंने तुमसे कहा था न कि ये मूडी मूर्ख है।” राहुल साेफी काे उलाहना दे रहा था।
“तुम मूडी से खफा क्याें हाे?” साेफी ने उससे पूछा था।
“मूडी से नहीं मैं तुमसे खफा हूँ।” राहुल बिगड़ा था। “ही इज ए डाेप।” उसने बिगड़ते हुए कहा था। “जानती हाे सर राॅजर्स क्या साेचेंगे?” राहुल की अलग से चिंता थी।
सर राॅजर्स वास्तव में ही चिंताग्रस्त हाे गए थे। उस रात वाे सा नहीं पाए थे। उनकी समझ में न आ रहा था कि दुर्दांत जालिम काे परास्त करें ताे कैसे? ये एक अलग तरह के युद्ध का मैदान था। सारा खेल चुस्ती, चालाकी, धाेखा धड़ी और छल बल का था। इसे लड़ने के लिए अलग से सिपाहियाें की दरकार थी। अगर वाे मूडी काे बदलते भी ताे और था काैन जाे पार पा लेता?
“काश! मैं बूढ़ा न हाे गया हाेता।” सर राॅजर्स ने करवट बदल कर लंबी निःश्वास छाेड़ी थी, और वाे साे गए थे।
साेफी काे भी गहरा आघात लगा था। उसका जालिम काे पकड़ना और दाे-दाे हाथ करने का सपना याें धराशायी हाे जाएगा उसे उम्मीद न थी। उसे भी मूडी पर राेष हाे आया था।
“क्या मुझे ही कूदना हाेगा इस जंग में?” साेफी ने स्वयं से सवाल पूछा था।
लेकिन जालिम काे पकड़ने की काेई रूप रेखा सामने न थी। साेफी उत्तर भी देती ताे क्या देती।
मूडी का दिल्ली से खाली हाथ लाैटना स्काई लार्क पर वज्रपात हाेना जैसा था।
सर राॅजर्स ने स्काई लार्क की मीटिंग बुलाई थी। उनका चेहरा उतरा हुआ था। आंखाें में निरी निराशा भरी हुई थी। उन्हें ताे मूडी से बड़ी-बड़ी आशाएं थीं। लेकिन जाे नाकामी मूडी लाया था सर राॅजर्स उसे पचा न पा रहे थे।
स्काई लार्क की मीटिंग में आए सभी मैंबर्स हताेत्साहित थे। सबके चेहरे उड़े हुए थे। मिशन का यूं मझधार में आ कर डूब जाना सभी काे बुरा लगा था। मूडी से किसी काे भी इस तरह की उम्मीद न थी।
और मूडी भी, जिसने अपने आप काे धुरंधर मान लिया था – अब नजरें नीची किए चुपचाप बैठा था।
“ताे क्या हम मान लें लैरी कि मिशन किलर हैज फेल्ड?” सर राॅजर्स की आवाज चटकी थी। बहुत क्षतविक्षत हुए लगे थे सर राॅजर्स।
लैरी चुप था। लैरी शर्मिंदा था। उसकी समझ में न आ रहा था कि क्या कहे?
“इट्स ए माइनर पाॅइंट सर।” बरनी बाेल पड़ा था। “लैट्स फाइंड द साॅल्यूशन सर।” बरनी की राए थी। “औरत काेई अजब गजब आइटम नहीं है सर। मैं जानता हूँ कि दिल्ली और हैदराबाद में इस तरह के साैदे हाेते हैं। एक से एक सुंदर, स्मार्ट, पढ़ी लिखी औरत कम कीमत पर मिल जाती हैं। गरीबी – सर गरीबी इस कदर है कि दूर-दूर देश के दलाल औरतें ला-ला कर यहां बेचते हैं।” बरनी ने खुलासा किया था।
गमगीन हुआ वातावरण तनिक सा सहज हुआ था।
“हाकिम साहब से यूं सीधा भिड़ जाना गलत था।” राहुल कहने लगा था। “अगर जालिम का ठिकाना देखना ही था ताे लुक छिप कर देखते।”
सर राॅजर्स अभी तक चुप थे। उन्हें ताे एक अलग चिंता सता रही थी। जालिम के पांच बेटे और बेटियाें ने जाे सफलता हासिल कर ली थी वाे बेजाेड़ थी। अकेली लिंडा कैराेल ही अगर चाहती ताे अमेरिका काे ड़बाे देती। अभी ताे अन्य छह का सुराग ताे मिलना बाकी था। हाे सकता था कि जालिम किसी पल भी गजब ढा सकता था।
“कब तक उलझे रहेंगे हम इन ऊलजलूल बाताें में?” सर राॅजर्स की आवाज में संत्रास था। “आई वाॅन्ट ए साॅलिड स्कीम बाॅइज।” उनका आग्रह था।
“हम ठीक रास्ते पर हैं सर।” लैरी ने उन्हें धीरज बंधाया था। “थाेड़ा सा काेर्स करैक्शन चाहिए।” लैरी ने तरीका सुझाया था।
“काेर्स करैक्शन ..” सर राॅजर्स ने स्वीकार में सर हिलाया था। “यही ताे जालिम करने लग रहा है लैरी।” टीस कर बाेले थे सर राॅजर्स। “ही वाॅन्ट्स ए ऑडरलैस वर्ल्ड एंड गाेल्ड करेंसी इन ल्यू ऑफ पेपर करेंसी और पूंजीवाद का अंत।”
“अभी नहीं आएगा पूंजीवाद का अंत सर।” बरनी ने प्रतिवाद किया था।
“अगर कुछ हाे गया ताे अमेरिका हमें माफ नहीं करेगा बरनी।” सर राॅजर्स का गला भर आया था। “मूडी!” सर राॅजर्स ने याचक स्वराें में मूडी काे पुकारा था। “मुझे तुमसे बड़ी उम्मीदें हैं माई सन।” सर राॅजर्स भावुक हाे आए थे। “मैं नहीं चाहता कि मैं तुम्हें डिमाेट करूं। मिशन किलर के मालिक तुम्हीं रहाेगे। चाहे जीताे, चाहे हाराे, मुझे इसकी चिंता नहीं है। तुम साेच लाे, समझ लाे। कल फिर से मिलते हैं।” सर राॅजर्स ने सभी बैठे मैंबराें काे निगाहाें में भर कर देखा था। “बाॅइज।” वाे गंभीर थे। “शिकस्त इज नाॅट माई कप ऑफ टी।” उन्हाेंने घाेषणा की थी और उठ गए थे।
सन्नाटा छा गया था स्काई लार्क के काॅनफरेंस रूम में।
काेई नहीं हिला था, काेई नहीं डुला था। सब चाेरी-चाेरी मूडी काे ही देख रहे थे। मूडी भी गहरे साेच में डूबा था। सर राॅजर्स का कहा एक-एक शब्द उनके कानाें में गूंज रहा था।
शिकस्त इज नाॅट माई कप ऑफ टी – हर स्काई लार्क के मैंबर ने सुना था, समझा था और इसे एक नारे की तरह ग्रहण किया था।
अब उन्हें हारना नहीं था।

मेजर कृपाल वर्मा रिटायर्ड