उपन्यास – भोर का तारा -नरेन्द्र मोदी से उध्रत –
महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !
गढ़े मुर्दे उखाड़ना अब मेरे लिए ज़रूरी हो गया था !
कारण स्पष्ट था . अगर शैतानों को मुर्दा मान कर दफना दिया जाए …और फिर उन्हें शहीद का नाम सौंप दिया जाए….तो उस में सुगंध पैदा हो जाती है ! जनता को सच-झूठ का क्या पता लगता है ? मुर्दे भी बोलने लगते है . जो लाशों पर लिख दिया जाता है – वही तो पढ़ा जाता है …?
लेकिन मुझे इन गढ़े मुर्दों से बदबू आने लगी थी ! मैं चाहने लगा था कि अब इन्हें ….उखाड़ कर सच को हवा में सुखा दूं ….ताकि ये शुद्ध हो जाए …और अपने असली आयाम पर आ जाए ! मैं अब दूध का दूध और पानी का पानी कर देना चाहता था ताकि आने वाला ‘कल’ हमें दोषी करार न देदे …?
मैंने कहा था ;-
“ये देखिए ! गाजवा टाईम्स ! ये पाकिस्तानी अखबार लहौर से प्रकाशित होता है . ये लिखता है – हमारे इन नगर निवासियों को भारतीय पुलिस ने मार गिराया है ! इन की कुर्बानियां काबिले तारीफ़ हैं ! इस अखबार मैं इन आदमियों का पूरा पता है …नाम है …और पूरा व्योरा है ! और ये अखबार भी लश्करे-ए -तयबा का मुख -पत्र है !”
लेकिन मेरी इस गुहार को मीडिया ने सुना तक नहीं ! किसी ने भी मेरी बात पर गौर नहीं किया . तब मुझे भी लगा था कि बिना किसी संचार माध्यम की सहायता के मैं भी अधूरा ही था …गूंगा-बहरा था ! मैं चाह कर भी अपनी बे-गुनाही सिद्ध नहीं कर सकता था ?
देश और जनता के कान मेरी बात सुनने को राज़ी न थे !
“केंद्र सरकार -जो इशरत जहां को ले कर झूठी कहानी गढ़ रही है , उस के खिलाफ एक वी आई पी को जो सूचना मिली है – उसे पढ़ें , ‘इशरत जहां इस आत्मघाती दस्ते का सदस्य थी ! उसे लश्कर ने भरती किया था . इस दस्ते की योजना गुजरात के सोमनाथ व् अक्षरधाम मंदिर ….व् महाराष्ट्र के सिद्धविनायक मंदिर पर हमला करना था !”
लेकिन इस तथ्य को भी किसी ने पैरों न चलने दिया ! यह तो ‘हिन्दू-मुसलमान’ हेट -गेम का हिस्सा बना कर भुला दिया गया ! कहा गया – ये तो बेकार की दलीलें हैं ! बाबरी मस्जिद को ढा देने के बाद ये तो हिन्दूओं के झूठे आरोप हैं !
फिर मेरे सामने कुछ सरकारी फाईलों में दर्ज खुलासा आया तो …मैंने उसे झट से पकड़ लिया ! एक राहत मिलती लगी थी , मुझे !!
खुफिया विभाग के संयुक्त निदेशक राजेन्द्र कुमार को सी बी आई गिरफतार करने में जुटी थी ! उन का आरोप था कि राजेन्द्र कुमार ने गलत सूचना दे कर …इशरत जहां को मरवाया था ! यह भी खबर थी कि ..वो गुजरात पुलिस की कस्टडी में इशरत जहां से मिलने भी गए थे . मुठभेड़ की सारी साजिश को अंजाम भी इन्ही ने दिया था !”
लेकिन मैं कह रहा था कि खुफिया पुलिस का काम केवल सूचनाएं जुटाना था …अंतिम अंजाम देना न था !
केंद्र सरकार ने अपना अलग से मन बना लिया था ! जैसे भी हो …..जिस प्रकार से भी हो ….मछली जाल में आनी ही चाहिए ! चाहे अपनी ही सरकारी संस्थाएं बदनाम क्यों न हो जाएं ….कोई भी कीमत अदा क्यों न करनी पड़े ….पर नरेन्द्र मोदी ……….
एक और जोर बंधा था – जिस में मेरे खिलाफ झंडा बुलंद करने वाली कांग्रेस व् अमेरिका -अरब से फंड लेने वाले एन जी ओज …सब ने मिल कर ….इशरत की माँ …शमीमा केसर को केंद्र से यह मांग मनवाने को कहा था – कि इस मामले की जांच …सी बी आई के अधिकारी श्री सतीस वर्मा से कराई जाए !
एक और बात भी आप को बता ही दूं !
आई वी ने सी बी आई निदेशक को बताया – सतीस वर्मा और राजेन्द्र कुमार एक दूसरे को फूटी आँख नहीं देखते ! दोनों की अन-बन है . बात मीडिया तक आ अहुंची तो गज़ब हो जाएगा …? लेकिन सरकार ने कहा . “ये मांग शमीमा कैसर की है ! इस का सम्मान किया जाए !! वह इशरत जहां की माँ है !!!”
और केंद्र सरकार ने अपने ही लोगों का तमाशा बना दिया ….?
और तो और ….केन्द्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार सिंदे जी ने सोनिया जी के कारण ….एक खूंख्वार मुसलमान को …आई वी का निदेशक बना दिया !!
ये सब मुझे घेरने के लिए हो रहा था ….!!
२६ नवम्बर २००५ गुजरात पुलिस ने मुठभेड़ में एक और कुख्यात पुलिस के भगोड़े – शाहबुद्दीन को मार गिराया था ! महाराष्ट्र पुलिस ने इसे भगोड़ा घोषित किया हुआ था . इस की पत्नी कौसर बी को भी गुजरात पुलिस ने मुठभेड़ में मारदिया था . और तुलसी राम प्रजापति को भी गुजरात पुलिस ने ही एक मुठभेड़ में मारा था . तुलसी राम प्रजापति शाहबुद्दीन शेख की हत्या का चश्मदीद गवाह था !
लेकिन कमाल ये था कि …आतंकी शाहबुद्दीन को ….विपक्षियों ने मिडिया के साथ मिलकर ‘मौलाना’ बना दिया था ! ये भी अब मेरे ही गले की हड्डी बन गया था !!
शाहबुद्दीन मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के गिरिया गाँव का रहने वाला था . यह एक हिस्ट्री शीटर था . इस पर ९० के दशक में हथियारों की तस्करी का मामला …दर्ज था ! इस के गिरिया गाँव स्थिति घर से १९९५ में ४० ए के ४७ राइफल बरामद हुई थीं . गुजरात और राजिस्थान के मार्वल व्यापारिओं से यह वसूली करने के लिए अंडर वर्ल्ड दाऊद इब्राहीम के गुर्गे छोटा दाऊद उर्फ़ – शरीफ खान पठान से जुडा था ! इस के साथ अबुल लतीफ़ , रसूल परती और ब्रिजेश सिंह भी थे ! यह सब लश्कर-ए- तयबा के सदस्य थे .
संजय दत्त का मामला जब सुर्ख़ियों में था ….तब …शाहबुद्दीन भी अखबारों के अग्रिम पन्नों पर छपता था ! महाराष्ट्र पुलिस ने तब शाहबुद्दीन सहित १०० लोगों को आरोपी बनाया था . और यह वहां से किसी तरह निकल भागा था ….और ….
लेकिन हमारी केंद्र सरकार के लिए यही आतंकी शाहबुद्दीन अब ….एक बे-गुनाह था ! उस की पत्नी कौसर बी ….और …तुलसी राम प्रजापति …कुछ ऐसे महिमा मंडित लोग थे जिन्हें ….पुलिस के दरिंदों के ना-पाक हाथों ने मार गिराया था ….और पूरी मानवता पर …एक न्रशंस प्रहार किया था !
नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के सिवा ….इन मुठभेड़ों का अन्य कोई कारण था ही नहीं ….? सब जैसे हम दोनों के ही इशारों पर हुआ था ….? और अब जो भी होना था ….उसे अगर समय होते न रोका गया …तो ….शायद …..
२००७ में इसी प्रकार की संभावनाओं को रोकने के लिए पूर्व डी आई जी , डी सी बंजारा सहित अनेकों वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को गिरफतार किया गया था ! मुझे – माने कि नरेन्द्र मोदी ….और अमित शाह को …केंद्र ने एक संकट मान लिया था !! भविष्य का एक ऐसा संकट जिस से ….अब और अभी निपट लेना ज़रूरी हो गया था ….!!
इसी योजना के तहत केंद्र सरकार ने सारे आतंकी मुसलामानों को …शहीद….बे-गुनाह ….और मसीहा ….मौलाना के नामों से पुकारना आरंभ कर दिया था ! और जो पत्रकार इस तरह के लेख लिख रहे थे उन के भी इनाम-इकरार तय थे !
लोमड़ी के इशारे पर सारे के सारे गीदड़ अब शेर को देख-देख कर …हाऊ-हाऊ करने लगे थे ! उन का देश-विदेश सब एक था . सब एक गुट में थे . नए-नए आरोप और प्रत्यारोपों को तीरों की तरह ईजाद किया जा रहा था ! नरेन्द्र मोदी और अमित शाह दो ही तो नाम थे …जिन के साथ देश-विदेश और पार्टी-पॉलिटिक्स के सारे सरोकार संबंध जोड़ दिए गए थे !
“देखिए ! देश की छवि विदेश में किस तरह गिरी है ….?” अब चर्चा होने लगी थी . “अमेरिका तो यहाँ तक कह रहा है ….कि अगर मोदी न ….रुका ….तो ….”
“पूरे विश्व में भारत की नाक नीची है ….! मुसलामानों के साथ जो बर्ताव हो रहा है ….वह तो …..?”
बाबरी मस्जिद से ले कर गोधरा काण्ड तक ….और उस के बाद इशरत जहांन तक …सौहार्बुद्दीन …कौसर बी …और प्रजापति सभी के सभी आसमान के सितारे थे ….चमचमाते सितारे ….थे …जिन से उम्मीद थी कि एक न एक दिन …मिल कर …नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को ….ले कर ये गहरे में डूब जाएंगे ….?
एक तरह से हिन्दू और मुसलमानों को फिर …बड़ी ही चतुराई के साथ …आमने-सामने ला खड़ा किया था ….? कांग्रेस तो अपने इस खेल की पुरानी खिलाड़ी थी ! अब कांग्रेस को पक्का पता चल गया था कि मोदी इस शय पर मात जरूर ही खा जाएगा ! और अगर वह लड़ा …उस ने मुसलामानों पर हमला किया ….या और भी कोई चाल खेली …..तो खेल और भी रंग पर आ जाएगा !
कांग्रेस मुसलमानों की भी सगी नहीं है – यह तो मैं भी जानता हूँ !
लेकिन कांग्रेस के लिए उस का हित साधन ही श्रेष्ठ होता है ! उसे देश हित …समाज हित ….या किसी और के हित की चिंता नहीं होती ….?
अब जाट मरे ….या सांप ….कांग्रेस को तो फायदा ही फायदा था ….!!
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श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!

