बहुत ख़ुश कर
गईं हो माँ अब
तुम मुझको
ढ़ेर लिबास
दे विदा मेरी
भर गईं हो
तुम तो
रोज़ नया तुम्हारा
आशीर्वाद पहन
अब घूमूँ फिरूँ मैं
मन ख़ुश हो गया
ऐसी विदा भर
गई हो तुम तो
पर तुम यह
सब पहनतीं तो
मन ज़्यादा हँसता
तुम्हें रोज़ सजा-धजा
देख सच! मन खिल
उठता
आजाओ माँ!
भूल से आकर एकबार
ख़ुश ही कर दो
मुझे दी हुई
विदा एकबार
फ़िर पहनकर
मन ख़ुश करती हुई
फ़िर से संग चल दो

