Site icon Praneta Publications Pvt. Ltd.

समय निकल गया उड़ते-उड़ते

tumhare naam

कुछ तुमसे कहूँ

कुछ तुम सुनोगी

अब क्या कहूँ मैं

तुम क्या सुनोगी

बचपन निकल गया उड़ते-उड़ते

जवानी तुम संग खेले खाए

फ़िर वो निकल गई उड़ते-उड़ते

ब्याह दिया माँ परदेस में मुझको

तुम्हारा साथ छूट गया चलते-चलते

गिने दिनों में छोड़ गईं तुम

तुमसे माँ का रिश्ता ख़त्म हो गया देखते-देखते

तुम्हारी यादों संग अब रह गया है.. जीवन

जब भी तुम्हें मुड़कर अब देखती हूँ.. मैं

न जाने कहाँ खो गईं तुम देखते-देखते

आ जाओ माँ

फ़िर मिलो न आकर

नहीं तो यह समय भी बीतेगा

उड़ते-उड़ते

आओ अब मिला करो

रोज़ सपनों में तुम..माँ

कहीं शेष समय न निकल जाए

उड़ते-उड़ते

Exit mobile version