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Raastriy Parv-15 August !

वह अकेला !!

प्रात: १२ अगस्त २०१८ ट्राफलगार स्कवैयर लंदन में लार्ड सफीक कुरैशी- सिख फॉर जस्टिस के लिए जमा सरदारों की भीड़ को संबोधित कर रहे हैं ! कह रहे हैं – सन~२०२० तक पंजाब को एक स्वतंत्र राष्ट्र बन जाना चाहिए ! पूरा यूरोप कह रहा है ….लंदन के लोग कह रहे है … और हम कह रहे हैं ….

अरे,अरे ! ये कौन बबाल उठ खड़ा हुआ ….? भारत माता की जय ….! गाँधी तुम अमर रहो ….!! कौन लोग हैं , ये …? रैली ही चौपट कर दी  ….? रंग में भंग डालने ये कौन लोग चले आये हैं …..

खालिस्तान बनाने की बात बनते-बनते बह गई है !! 

आस-पास बैठ कर लोग बतियाने लगते हैं _ इन का मन नहीं भरा है . इन्हें गहरा अफ़सोस है . इन्हें अब नीद नहीं आती ! सोचो ! एक नंगे फ़कीर ने इन का फलता -फूलता साम्राज्य फूँक दिया !! वह माना ही नहीं . वह इन से मरा भी नहीं ! ले कर ही डूबा , पाजी !! 

“कैसे ….कैसे, हाँ,हाँ ! कैसे फिर से हिन्दुस्तान हाथ लगे ….?” यही प्रश्न है जो इन्हें रात-दिन खाए जा रहा है . “लड़ाओ उन्हें ….आपस में ….!” कोई कहता है . “मैं कहता हूँ – इन की भाषा खत्म कर दो !”दूसरा राय देता है . “नहीं,नहीं ! इन के बच्चों को बिगाड़ दो ….! शिक्षा का शस्त्र …तो हमारे पास है ! इन के बच्चों से ही इन के देश को तुडवा दो ….! और बाहर बैठ कर तालियाँ बजाओ !!” अनमोल राय आती है .

“कुच्छ नहीं होगा , मैं कहता हूँ !” एक अनुभवी आदमी अब की बार आगे आए हैं . “सिखों को पकड़ो ….और हिन्दूओं से लड़ा दो ! ‘खालिस्तान-जिंदाबाद !’ के नारे लगने दो -पूरे देश में …! जी-सा आ जाएगा !! थोडा घी डालने की देर है – धडाक से टूट जाएगा , देश !! एक बार पंजाब अलग हुआ नहीं कि …देश के टुकडे होते ही चले जांयगे ….”

“फिर तो राज हमारा ही होगा ….?” प्रसन्न होते  हैं , सब मिल कर .

“मैं तो कहता हूँ …ये बेल मढ़े नहीं चढ़ेगी …! फ़ैल हो चुके हैं ये – ब्लू -स्टार में  ! दलितों को पकड़ो, भाई ! मुसलामानों को भी भड़काओ . इतना बड़ा मूवमेंट खड़ा होगा कि ….दस बी जे पी ..भी खप जाएं…तो भी  !” उस ने साथियों को घूरा है . “ये लोग हमारे झांसे में जल्दी आएँगे ! लालची हैं , न ….?”  

“ठीक कहते हैं , आप ! हमारे ये आकडे ही तो अजेय है ! हम जीतते ही बदमाशी से हैं ! राजनीति अगर विश्व में किसी को करनी आती है तो ….हम हैं ! ऐसे -ऐसे कुँए खोदे हैं , हमने कि ….सारा संसार आज भी मानता है ….सराहता है ….! हमारी सामरिक चतुराई के सामने …किसी की भी दो कौड़ी नहीं उठतीं ….! देख लेना …..”

लेकिन जो कुआँ खोदता है …..वही गिरता है ….ये तो आम कहावत है ….!! 

“नहीं , जी ! लेकिन ….हम ….”  रुक जाता है. बोल ! ठहर जाता है , विचार !! 

“गिरे तो हैं , महा पुरुष ….?”प्रश्न उन के सामने खड़ा ही रहता है . “और गिरोगे भी ….! हाँ , भारत अब नहीं गिरेगा …! न झुकेगा ….न टूटेगा …!! अब तो आप ही …..”

“भीख मांगेगे ….हम ….? अरे , नहीं यार ! हमारे पास तो …..”

“है क्या ….?” हंस रहा है , वक्त . ताली पीट-पीट कर हवा भी हंस रही है . चिड़िया चहक रही हैं ….और सितारे टिमटिमा रहे हैं ! 

-जिस ने तुम्हें ढाया ….उसी के तीन बंदर क्या कहते हैं ….? कभी पढ़ कर सोचना कि – वह अकेला आदमी कितना सच्चा था …..

१५ अगस्त २०१८ के अवसर पर …..

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श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !! 

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