गाडी घर के गेट पर रूकी थी , और मेने सँभाल कर डॉक्टर द्वारा लिखी हुई दो दवाई की बातलों के साथ छोटे से प्यारे से इस फरिश्ते को गोद में लेकर बाहर उतारा था, हाँ!ऐसा लग ही नही रहा था कि एक महीने का नन्हा बालक है, शैतानियों से फ़ुरसतही नहीं थी,महरानी को—लाकर ऊपर पलँग पर बिठाया इस सफ़ेद बॉल को ,बस फिर क्या था ..जैसे पता ही नहीं कितनी पुरानी पहचान है …कानू की घर के साथ… जैसे अपना हो सब कुछ …जैसे अपने माता पिता और अपने घर में आ गयी हो।

खेल-कूद और बिस्तर पर उछल-कूद करने में मशगूल हो गई,, गिरते-गिरते दो बार बचाया …हर बार पलंग के किनारे पर जाकर नीचे झाँकना ,प्यारे लडडू को गले से लगाकर मना किया कि पंगा नहीं लिया करते “नीचे गिर जाएगा बेबी तो चोट लगेगी” पर नही, फ़ितरत से शैतान ज़्यादा थी, नहीं मानी चारों तरफ कुछ न कुछ लगना पड़ा ताकि खेलती रहे और गिरे नहीं। हा-हा-हा… याद आ गया एक जगह बुद्धु राम ने चादर भी गीली कर डाली, चलो कोई बात नहीं बच्ची है ट्रेनिंग दे देंगे । कुछ भी कहो छोटा सा उन का गोला नन्हें-नन्हें से पैर,पेपर कटिंग से बने हुए छोटे-छोटे कान और प्यारी सी छोटी पूँछ ,मन में पूरी तरह जगह बना ली । खाने -पीने के इंतेज़ाम के लिए डॉक्टर के यहाँ से ही ड्रूल्स का पैकिट ले आए थे, डॉक्टर की इंस्ट्रक्शन थीं की तीन महीने तक यही खिलाना है।

फिर क्या था हमने लडडू को सोफ़े पर बिठाया ..बच्चे स्कूल से आ ही गये थे… छोटी सी गुड़िया के आगे थोड़े से ड्रूल्स रख दिये… मोटे-मोटे दाने के रुप में होते हैं ये ड्रूल्स.. जैसे कॉर्नफ्लैक्स जो बच्चे दूध में डालकर खाते हैं,हँसी आती है…शैतान की खाला ने दो चार तो चबाए गरदन इधर-उधर मटकाकर फिर मुँह हटा लिया.. खैर! छोटी सी बच्ची थी तो हमने कहा कि इतना ही खायेगी….

खिलोने की टोकरी को खाली करा गया …और उसमें कानू का बिस्तर लगाया गया, पहले तो हमने सोफे पर ही सोने दिया ….आधी रात के बाद शैतानी शुरु, गिरने को हो गई सोफ़े पर से ….फटाफट उठाकर टोकरी में लिटाया ऊन के गोले को और टोकरी ऊपर से बन्द अब कूदो जितना कूद सकती हो …यकीन मानिये कानुश्री को अपना नया बेडरूम पसन्द आ गया, फिर क्या शान्त होकर सो गयीं।

चालाक और तेज़ दिमाग़ की तो बचपन से ही थीं…. सुबह-सुबह शोर मचाया टोकरी के अन्दर से अपना बेडरूम गन्दा नही करना चाहतीं थीं। न भूलने वाला तुम्हारा वो पहला दिन था हमारे साथ….मेरी प्यारी  कानू कोइ पुराने जन्म का अधूरा रिश्ता और अधूरे संस्कार ….जिनकी वजह से ही तुम्हें देखते ही माँ बेटी का रिश्ता कायम हो गया था….

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