इंसान अपना बचपन माँ- बाप के राज़ में की गई मस्ती और अपनी जवानी के कुछ मस्ती भरे पल कभी नहीं भूलता। उम्र का पहिया आगे दौड़ता ही चला जाता है… और कुछ मीठी यादें हमारे साथ सदा ही रहतीं हैं।

बस! कुछ ऐसा ही हुआ था.. बहुत दिनों के पश्चात दिल्ली शहर जाना हो गया था। अब जब बचपन से बड़े होने तक माता-पिता संग इस शहर में रहते थे.. तब बातें अलग थीं, शहर में केवल सरकारी और प्राइवेट बसें ही चला करतीं थीं। वैसे अपनी जवानी में और कॉलेज के दिनों में हम भी खूब घूमें हैं..  दिल्ली शहर। दोस्तों संग कॉलेज के दिनों में बसों में बिना ही किराया दिये स्टाफ़ चलाकर घूमनें का मज़ा ही अलग था। अब तो कहाँ वो बातें हैं.. बड़े जो हो गए हैं।

दिल्ली शहर आकर हमनें मेट्रो यात्रा के खूब आनंद उठाए थे.. वाकई मेट्रो में बैठकर हम तो अपने कॉलेज के ज़माने में उठाए हुए.. बसों के आनंद को भूला बैठे थे। अब हज़रत नुजामुद्दीन स्टेशन से मेट्रो में बैठना हुआ था..हमारा। सफ़र का मज़ा लेते-लेते अचानक से ही साउथ कैंपस के दुर्गाबाई देशमुख मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन रुकी थी.. साउथ कैंपस नाम आते ही.. जवानी के रंगीन दिन और मस्ती सामने आ गई थी.. पर साउथ कैंपस के साथ आज बहुत दिनों के बाद हमनें स्वतंत्रता सैनानी दुर्गाबाई देशमुख का नाम भी सुनने में आया था। उनका नाम ट्रेन में announce होते ही हमनें अपने साथ बैठी एक छात्रा से अचानक ही सवाल कर दिया था,” बता सकती हो बेटा! दुर्गाबाई देशमुख कौन थीं!”।

छात्रा ने हमारी तरफ़ देखा था.. और हमारे सवाल का जवाब देते हुए कहा था,” हम्म! हाँ! आंटी! इनके बारे में सुना तो था.. कि स्वतंत्रता सैनानी थीं.. पर हम ज़्यादा नहीं जानते!”।

और छात्रा इतना ही हमें बताकर चुप हो गई थी। हमें भी लगा था, कि भई! आजकल के छात्र-छात्राओं को हमारे देश के कुछ प्रमुख और महान लोगों की जानकारी तो होनी ही चाहिये.. सो हमनें उस छात्रा को दुर्गाबाई देशमुख के विषय में जानकारी देनी शुरू कर दी थी।

दुर्गाबाई देशमुख ने आजादी के लिए हमारे संघर्ष में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दक्षिणी राज्यों में, आंध्र में महिलाओं का सत्याग्रहों का सबसे बड़ा दल योगदान करने का अनूठा गौरव था, जो कि कठिनाइयों से बेखबर, जेलों में प्रवेश करता था। 1 9 22 के असहयोग आंदोलन में, बारह साल की एक जवान लड़की काकीनाडा में सत्याग्रह की पेशकश की। इस युवा लड़की, दुर्गाबाई, बाद में एक अनोखी संगठन स्थापित करके अपनी गतिशील क्षमताओं का प्रदर्शन किया– आंध्र महिला सभा – जिसे पूरे दक्षिण भारत के महिलाओं के कल्याण और शैक्षिक संस्थानों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

दुर्गाबाई, देश के बाकी हिस्सों से परिचित होने के कारण 15 अगस्त 1 9 0 9 को राजमुंदरी में दुर्गैबाई देशमुख का जन्म हुआ था। वह बिना सह-सहकारिता आंदोलन में भाग लेते थे जब वह शायद ही बारह वर्ष की आयु में थी। गैर-सहकारिता आंदोलन के निलंबन के बाद, उन्होंने कबीन और बुनाई में महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए स्कूलों की स्थापना करके राजामुंद्री और काकीनाडा के आसपास के गांवों में गांधीजी के आदर्शों का प्रचार किया।

हमें भी पूरी तरह से जानकारी न होने के कारण हमनें छात्रा को लिखित जानकारी पढ़कर सुनाई थी। हम दोनों को ही इस महान हस्ती के बारे में पढ़कर अच्छा लगा था.. और आज एक देश के एक और महान हस्ती के विषय में जानने का अवसर मिला था। न ही साउथ कैंपस दिल्ली का मेट्रो स्टेशन दुर्गाबाई देशमुख के नाम पर होता.. और न ही हमें पूरी जानकारी ही हो पाती।

दुर्गाबाई देशमुख की चर्चा करते-करते हमारा और छात्रा का स्टेशन भी आ गया था.. और आज एक नई पहचान बना हम दोनों एक दूसरे को  टाटा कर अपने-अपने रस्ते निकल लिये थे।

Discover more from Praneta Publications Pvt. Ltd.

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading