वो मासूम आँखें इंतजार कर रही होंगी कब आएगी .. कहाँ चली गई बोल तो नही पाती पर हां याद करती होगी … आ जाऊंगी .. मुझे भी वो प्यारा सा स्पर्श याद आ रहा है, वो गले से लग जाना और पूछना माँ कहाँ चली गई थी .. में भी साथ चलती। पर कैसे ले जाती अपने साथ …. इंतजार करती वो मासूम आँखे मेरे चेहरे के सामने आ जाती हैं … आ जाऊँगी मेरी भोली बंदर ….
मासूमियत कानू की

