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खानदान 133

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” कहाँ है! वो pen-drive..!!” मुझे तो कहीं भी नहीं मिल रही है! अभी चाहिये मुझे! मेरा कुछ ज़रूरी सामान है! उसमें!”।

रमेश ज़ोर से चिल्ला कर pen-drive के लिए बोला था.. जो उसे कहीं भी सारे ढूँढने पर नहीं मिल रही थी। सुनीता भी यह सुनकर आश्चर्यचकित हो रही थी.. कि आख़िर pen drive जैसी चीज़ घर से जाएगी कहाँ..!!

पूरा घर छान मारा था.. लेकिन उस pen-drive का कहीं भी खोज नहीं लग पाया था। रमेश ग़ुस्से में तम-तमा कर बोला था..

” ऐसे नहीं मिलेगी! वो pen-drive..!! एक बाबा है! मै आज शाम को उससे पूछ कर आऊँगा..!! झट्ट से बता देता है! सब कुछ!”।

झाड़-फूँक करने में बहुत तेज़ है! वो बाबा!”। उसकी आँखों के अंदर सारी पिक्चर चलती रहती है..! देखना! अपनी आँखों के अंदर पिक्चर चला कर कैसे पकड़ता है..! चोर को!

और रमेश वाकई में शाम को उस बाबा से पूछ कर आ गया था.. जिसने रमेश को बताया था.. वो pen-drive आपकी पानी में है!

” बाबे ने कहा है.. pen-drive पानी में है! हम्म! कहाँ हो सकती है! पानी में! हाँ..!!! पीछे का गटर चेक करना पड़ेगा!”।

रमेश दिमाग़ का तेज़ दिमाग़ तो पहले से ही था.. लेकिन इस तेज़ दिमाग़ का circuit पूरा उल्टा फिट था। जो सुनीता के घर की बर्बादी का कारण बन कर रह गया था। लेकिन जो भी हो! अब सुनीता का माथा भी यह बात सुनकर ठनक गया था.. कि pen-drive पानी में है!

बात यह सोचने वाली थी… अगर यह सच था.. तो फ़िर pen-drive पानी में गई कैसे..??

” मैं इसके साथ रहना नहीं चाहता..! यह मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है! कुछ भी हो मेरी तो बस! वही रहेगी..!!”।

” और मेरा ग़ुस्सा काबू से बाहर हो गया था..!!”

इस pen-drive का रहस्य जानिए अगले ख़ानदान में।

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