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Humen Umeeden Thi

बुरा न माने …..हमें तो अपने विश्वविधालयों में उच्च-शिक्षा प्राप्त करते अपने नौ-निहालों से उम्मीदें थीं कि वो हमारा देश-विदेश में नाम रोशन करेंगे . कुछ ऐसे कीर्तिमान स्थापित करेंगे वो – जो विश्व में मिसालें मानी जांयगी ! हमें उम्मीदें थीं कि अब हमारे विश्वविधालय इस तरह के वैज्ञानिक तैयार करेंगे – जो गरीबी तो क्या , गरीबी के बाप को भी खा जाएंगे और देश को ही क्यों पूरे विश्व को खुशहाली की खबरों से लबालब भर देंगे . कुछ इस तरह के दार्शनिक निकलेंगे – जो समाज की कानी आँख में आदर्शों का अंजन आंज कर उसे एक स्वस्थ जीवन-द्रष्टि देंगे. और कुछ इस तरह के विश्वकर्मा भारत मैं पैदा होंगे – जो ताज महल तो क्या , ऐसे अजूबों को जन्म देंगे – जिन्हें दंग हुए लोग देखते ही रह जांयगे !

लेकिन हुआ तो कुछ नहीं !! टाई -टाई …फिस्स …..! ठेंगा ..लेलो कन्हेयाँ कुमारों का …..? देश और समाज -सुधार तो दूर ….वो तो अपनी रोटी तक नहीं कमा सकते ! सब को अब आरक्षण चाहिए …नौकरियां चाहिए ….! सब को सब्सिडी चाहिए . सब को सब चाहिए – बिना कुछ किए-दिए ! पूछने पर कहते हैं – ये रहा प्रमाण-पत्र , दलित का ….महा -दलित का …..महा-महा दलित का ….!

और पूछ कर देखो – कि क्या कुछ काम-धाम भी आता है …? पढ़े-लिखे भी हो ….? स्पष्ट उत्तर आएगा – कुछ नहीं आता ! नक़ल कर के इम्तहान पास किए थे , जी !! देश-भक्त – भगत सिंह को जानते हो ….? उत्तर – फोटो तो देखा था – एक बार !

“इस तरह के नारे लगाते हो ….?”

“वो तो नेताओं ने सिखा दिए हैं …..! पिला-खिला देते हैं …..तो हम नारे लगा देते हैं ….!!” हा-हा-हा …., हंसी का चक्रवात हकीकत को उड़ा ले जाता है.

बुरा क्यों मानते है ….? गुलामों के लिए बनी शिक्षा-प्रणाली ….गुलाम पैदा नहीं करेगी तो क्या …देश-भक्त देगी ….?

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