रक्षाबंधन

रक्षाबंधन

” रक्षाबंधन आने को है..! सुन्दर राखियाँ खरीद लाना!”। ” अभी समय है! खरीद लाएंगे.. “। ” नहीं! आज ही.. courier से पहुँचने में वक्त लगता है.. पिछली बार भी हमारी राखी देर से पहुँची थीं”। ” चलो! भई! ठीक है.. जो हुक्म!”। पतिदेव...
पिताजी

पिताजी

पिताजी तुम्हारी याद सताई तुम्हारी याद में आँखे नम हो आईं अच्छा न लगा तुम्हारा यह फैसला हमें पर ईश्वर के आगे किस की चल पाई मन जानता है आपका वक्त कठिन बीत रहा होगा हिम्मत रखना ऊपर वाले के यहाँ सबकी सुनवाई आऊँगी मैं पिताजी तुमसे मिलने जहाँ बिठा आपको मेरा मायका बनाया है...

ये औरतें

ये जो औरते होती है न रो लेती है अक्सर ये मरद नही कर सकते ऐसा साफ शफाक आखे ले कर आजाती है मुस्कुराते हुये फिर आगन मे फूफी मासी काकी से बात करती नही गिरने देती एक भी आसू दामन पर मरद ऐसा नही कर पाते पता नही कैसे कर मुस्कुरा देती है ये भरी आखो से Surinder...
बेवफा

बेवफा

काहे न कहूं बैरी तुझे बेवफा। कौन सा वादा किया है वफा। क्यू न कहूं मै तुम को बेवफा क्या कभी सुनी तूने मेरी सदा। घाव तेरे भी अब रिसते तो होगे तेरी बेबफाई का यही है सिला। कभी तूने आजमाया था मुझे अब रहा है आजमा तुझे खुदा। इतनी मासूम भी अब नही मै तुम से न करूगी ,जो अब...

इशक की महक

आती है महक इशक की फिजाओ से खत मेरे खुलेआम क्यू जला देते हो। याद तुम्हारी हमे बहुत आने लगी है, तुम जाने कैसे हम को भुला देते हो। मौत की कगार पर पहुंचा कर हमे फिर क्यू जिंदगी की दुआ देते हो। आवाज कभी सुन न पाये हमारी, अब क्यू पीछे से हमे सदा देते हो। आसां नही थी कभी यू...

जुदाई ने मारा

हम को तो यारा ,तेरी जुदाई ने मारा। तेरी शोहरत और ,मेरी रुस्वाई ने मारा। होश मे यू तो हम, पहले भी नही थे, उस पर तेरी आँख की गहराई ने मारा। सीने मे पड़ जाती ठंड़क तुझे देखने से पर हमे इशक की आग लगाई ने मारा। देखना तो जरा भीड़ मेरे जनाजे के पीछेतू कहता हो हमे बस तन्हाई ने...