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भोर का तारा – नरेन्द्र मोदी !!

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मैं बाल-बाल बच गया था !!

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !

उपन्यास अंश ;_

“विनय करने का वक्त चुक गया है , अमित !” मैंने अपनी द्रष्टि को ऊपर उठा कर कहा था . मैं जो देख रहा था -शायद अमित को उस का आभास न था ! “अब हमें संघर्ष करना ही होगा !” मेरी आवाज़ मैं एक तल्खी थी . “विरोधी दरवाज़े खटखटा रहे हैं !” मैंने अमित को वही बताया था जो मैं  सुन रहा था . “कहो तो ….खोल दूं …किवाड़ ….?” मैंने सीधे-सीधे प्रश्न किया था .

अमित अजान न था ! उस की निगाह में भी पूरा ही खेल था . उसे मेरे कहे का अर्थ समझने में देर न लगी थी . वह इस तरह के मामलों में बहुत तेज है . मैं जानता था …और मानता भी था कि अमित न तो डराने वालों में से था …और न ही पीछे हटने वालों का हामी था ! वह तो अब घुट कर चन्दन बन चुका था !!

“खोल दो ….!!” अमित का निर्भय उत्तर आया था . “मैं चौड़े में आ जाता हूँ ! कल ही गृह मंत्री के पद से स्तीफा दे देता हूँ ! अपने आप को सी बी आई के हबाले कर देता हूँ ! भेजने दो मुझे जेल ….?” उस ने अब मेरी आँखों में देखा था . “खूब रंग आएगा , भाई की !” वह मुस्कराया था .

जुलाई २००१० का समय था – ये !! 

पूरी राजनैतिक जमात अब हम दोनों के खिलाफ थी ! हम दोनों हर आँख की किरकिरी बन चुके थे . मीडिया हाउस , बुद्धिजीवी ,मानवाधिकारवादी , एन जी ओज …..और यहाँ तक कि तमाम विदेशी संगठन ….हमारे खिलाफ रची जानेवाली साजिशों में शामिल थे ! हम सब के लिए अछूत थे ….कम्युनल थे ….रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पैदा किए खतरनाक जरासीम थे ….जो सेक्युलर भारत के लिए असह्य थे ! हम से खतरा था कि …हम अगर जिन्दा रहे तो ….जरूर ही एक हिन्दू राष्ट्र की संरचना कर बैठेंगे ! और अगर भारत में हिन्दू राष्ट्र जैसा कुछ खड़ा हो गया तो ….जो लोग यहाँ अपनी अल्पसंख्यकों की आड़ में राजनैतिक दुकानें खोल बैठे थे ….उन का तो खेल ही ख़त्म हो जाएगा ….?

चालाकी से ….बहुत चालाकी से ये लोग देश को अपने अपने हितों के हिस्सों में बाँट बैठे थे ! सब ने अपने-अपने वोट बैंक बना लिए थे . सब के पास खाने-कमाने लायक सीटें थीं . सब के पास गुंडे मवालियों से ले कर …देशी दलालों की मजबूत टीमें थीं . ये इन के गुण-गान में लगातार लगीं थीं ! राजनीति के नाम पर एक अच्छा-ख़ासा व्यापार इन लोगों ने खड़ा कर लिया था ! खूब धन कमाँ  लिया था . जायदादें खड़ी कर लीं थीं . विदेशों में जा-जा कर पैसे जमा कर लिए थे !!

ये रहते तो विदेश में थे ….पर राजनीति देश में करते थे !! 

उन का मानना था कि  ….यहाँ की जनता को अनपढ़ और गंवार रखना बेहद ज़रूरी था ! छोटे-मोटे लालच दे कर इन्हें भ्रमित करना – इन के लिए श्रेष्ठ राजनीति थी ! आरक्षण का भूत और …दलित से ले कर महा दलित तक … का जाल बिछा कर …इन भोले-भाले लोगों को ……..मवेशी मान कर शादियों तक शाशन किया जा सकता था !

समाज अब देवी-देवताओं की नहीं ….नेता और अभिनेताओं की आरती उतार रहा था !!

और हम दो थे – मैं और अमित , जो अपनी राह पर चल चुके थे ! हमने गुजरात राज्य में जो बेजोड़ सफलता हासिल की थी …वह इन राजनेताओं ….मीडिया गुटों ….बुद्धिजीवियों ….एन जी ओज ….और यहाँ तक कि …विदेशी लोगों के हित में भी न थी ! इन का तो बना -बनाया खेल हमने चौपट कर दिया था ! 

और कांग्रेस पार्टी तो अब मुंह दिखाने लायक भी न रही थी !! 

हवा की दिशा मुड़ते देख सब के सब बौखला गए थे ! सब समझ गए थे कि …उन्हें स्वयं मिटने से पहले …हमें …..हम दोनों को मिटा देना था !! 

“बहुत ही संभल कर चलने का वक्त है , अमित !” मैंने खबरदार किया था , उसे . “सी  बी आई के ….सवाल-जबाब ….?”

“मुझे सारे के सारे उत्तर याद हैं, भाई जी !” अमित सहज था . “जेल जाने पर …….?’

“आई बिल ….कीप इन ….टच ….!” मैंने आश्वाशन दिया था , उसे ! 

राजिस्थान राज्य के गृह मंत्री गुलाब सिंह कटारिया से भी सी बी आई पूछ -ताछ कर रही थी . बड़ा ही संगीन मामला बन गया था ! 

पूरे देश में एक शोर लबालव भरा था – हत्यारा है , अमित शाह ! हत्यारा है – गुलाब सिंह कटारिया ! बे-गुनाहों का खून ….पुलिस की गोलियां …हिरासत में ले कर हुई हत्याएं ….और मुसलामानों ….माने कि माइन्योरिटी कम्युनिटी पर हुए जुर्म ….पूरे दिगंत पर छा गए थे ! पूरा आकाश रागारुण था ….मानो बे-गुनाहों के खून से लाल-लाल रंग गया था !!

और इस तमाम खून-खराबे के कारण हम दो थे – मैं और अमित शाह !! 

“भूलना मत , भाई जी कि ….” जेल जाते-जाते अमित कहने लगा था . “लोमड़ी हमेशा ही पूंछ से ज़मीन झाड कर बैठती है !” वह हंस रहा था . मुझे अचानक ही उस पर प्यार हो आया था . ‘कितना बहादुर है ये मेरा , अमित …?’ मैंने मन ही मन दुहराया था . “जब कि …दुर्दांत शेर …अपने आने-जाने तक के निशाँ छोड़ता है ! सबूत बना कर चलता है ….और दहाड़-दहाड़ कर ….दहशत पैदा नहीं करता ….अपनी ही मौत को आमंत्रित करता है !”

अब वह मुझ से उत्तर मांग रहा था ! अब वह चुप था . अब वह गंभीर था !! 

“ठीक है , भाई !” मैंने धीमे से कहा था . “नहीं दहाड़ेंगे …!!” मैं मान गया था . “जब तक तुम नहीं कहोगे ….शेर दहाड़ेगा नहीं !” मैंने वायदा किया था . 

राजनीति के खेल हैं ही विचित्र ! अनाप-सनाप बोलने से कभी -कभी बहुत नुक्सान हो जाता है ! अमित यह जानता था . अमित ताड़ गया था कि …उस के जाने के बाद …विरोधियों की निगाह …मुझी पर थी ! और मैं …अब उन के लिए ज्यादा दूर न था ….!! 

अब तो मुझे पानी को भी फूँक-फूं कर पीना था ! 

क्यों कि मुझे बताया गया था ;-

यू पी ए की सरकार ….कांग्रेस पार्टी ….पेड मीडिया ….सरकारी …व् …अमेरिकी और अरब फंड ….पर पलने वाले – पालतू एन जी ओज ….और अपने दिमाग को बेच कर …ज़मीर को गिरवी रख कर ….पैसे कमाने वाले बुद्धिजीवियों के लिए ….कल की फिदायनी ….यानी कि कथित आत्मघाती मानव बम्ब ….’इशरत जहां ‘ आज के समाज की संत मानली गई है !! उस के नाम पर अब नरेन्द्र मोदी को फांसी तक दी जा सकती है !!  

मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए थे ! कैसा विचित्र षड़यंत्र रचा जा रहा था ….? किस कदर मुझे जाल में फांसने के लिए …आंकड़ों का जाल बिछाया जा रहा था ….? 

गुजरात पुलिस की क्राईम ब्रांच ने १५ जून २००४ को एक मुठभेड़ में चार लोगों को मार गिराया था ! इन के नाम थे – जीशान जौहर , अहमद अली , जावेद गुलाम शेख और इशरत जहाँ ! ये लोग मेरे विरोधियों के द्वारा खरीदे हुए आतंकी थे ! ये मुझे मारने आये थे ! यह खबर सी बी आई ने गुजरात पुलिस को स्वयं ही दी थी ! लश्कर-ए- तैयबा के ये …चार आतंकी …मुझे मारने के बाद ….गुजरात राज्य में …दंगे करा कर …पूरे तंत्र को तहस-नहस कर देना चाहते थे !!

इन में से दो – जीशान जौहर और अहमद अली पाकिस्तानी नागरिक निकले थे ! तीसरा व्यक्ति – पिल्लई दुबई गया था …जहाँ उस ने धर्म परिवर्तन किया था …और मुसलमान बन गया था ! 

लश्कर के इशारे पर जावेद व् इशरत पति-पत्नी बन कर …इत्र कारोबारी के रूप में भारत के भीतर भ्रमण करते थे …ताकि उन पर किसी को शक न हो ! दोनों ने मिल कर मेरे आस-पास को सूंघा-समझा था !! 

लेकिन सी बी आई ने इन से पहले ही इन्हें सूंघ-समझ लिया था ! उन्होंने गुजरात पुलिस को सारी जानकारी दे दी थी ! और पुलिस ने इन्हें मारगिराया था !!

मैं बाल-बाल बच गया था ….!!!

तब केंद्र सरकार ने गुजरात हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था – ‘जावेद ….व् इशरत आतंकवादी संगठन -लश्कर-ए -तैयबा के सदस्य हैं !!’ 

लेकिन आज तो सब का सब उलट-पुलट हो चुका है ….!!!

…………………

क्रमश :

श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !! 

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