फूलों के सुन्दर
बागीचे में
हर भोर
तुम्हें
ढूंढ़ता है
मन
वो तुम्हारे
हाथ हिलाते
हुए मुस्कुराकर
टहलने को
देखने के लिये
तरसता है
मन
तुम्हारे बगैर
यह सुन्दर
बागीचा
सुनसान लग
रहा है
माँ!
अपने भोर
के टहलने
से एकबार
फ़िर
इस फूलों
भरे बागीचे
को गुलज़ार
कर दो
माँ..!!
स्वर्गलोक से
धरती पर
तुम एकबार
फ़िर उतर
कर आजाओ
माँ!!