रंजना और रमेश का रिश्ता अब खटास लिए आगे बढ़ रहा था। रंजना की बड़ी बहन का रिश्ता तय हो चुका था.. लड़का देखने सुनने में अच्छा और पढ़ा-लिखा था। दुबई में अच्छी नौकरी थी.. लड़के की! अच्छा-ख़ासा पैसा कमा लेता था। रंजना ने यह ख़बर रमेश को देने में बिल्कुल भी देर नहीं लगाई थी।
” पता है! आपको! यह रिश्ता मेरे लिये था.. पर..!!”।
रंजना यहाँ आगे कहते-कहते रमेश को लेकर रुक गई थी.. और पता नहीं क्यों चाहते हुए, भी अपनी बात को पूरा नहीं कर पाई थी।
रंजना की बहन की शादी की तैयारियाँ शुरू हो गईं थीं.. रमेश घर की गाड़ी सुबह से शाम तक भगाते हुए.. एकबार फ़िर से रंजना की नौकरी में लग गया था।
” आपको तो रंजना के घर शादी में बुलाते होंगें! “।
सुनीता ने रमेश से सवाल किया था।
” अरे! हाँ! क्यों नहीं बुलाएंगे.. रिश्ता है! मेरा!”।
रमेश ने रंजना लोगों को अपना रिश्तेदार बताते हुए, कहा था।
बहन की शादी की तैयारियाँ भी पूरी हो चुकी थीं.. और रंजना की बहन का विवाह भी सम्पन्न हो गया था। पर हैरानी की बात तो यह थी, की रमेश को विवाह में किसी ने भी आमंत्रित नहीं किया था। इस पर सुनीता ने फ़िर एक बार सवाल कर ही डाला था।
” देखा! मैने कहा था.. न! आपको नहीं बुलाएंगे! पर आप ही नहीं माने! ऐसे होते हैं क्या! रिश्तेदार!
” अरे! वो तो आने के लिये बोली थी.. पर फ़िर उसकी भी बात ठीक ही थी.. उसकी माँ ने कहा था.. लोगों से क्या कहेंगें कि ये अनजान इंसान जिसको पहले कभी हमनें अपने यहाँ देखा ही नहीं.. कौन है! ये!”।
अरे! इतनी भयंकर रूप से नौकरी बजाने के बावजूद भी रमेश रंजना के घर में अंजान कैसे हो गया! ये अनजानापन कब इस गहरे रिश्ते को अजनबी बना गया.. जाने खानदान के साथ।