” Hello! हाँ! हम बात कर रहे थे.. दिल्ली से! ज़रा जल्दी में हैं! तुम अपने कुत्ते को लेकर दिल्ली आ सकती हो क्या..! हमारे पास थोड़े दिनों के लिये!’।
भाईसाहब का दिल्ली से हमारे लिए फ़ोन आया था.. पर हमनें बिना ही कोई जवाब दिए फ़ोन काट दिया था।
” Hello! Hello..!! अरे! भई! क्या हुआ था.. हम Hello Hello करते रह गए थे.. और तुमनें हमारी बात का कोई भी जवाब न देते हुए, ही फ़ोन काट दिया था.. अब सुनो! दरअसल हमारे पास कुत्ते को लेकर बच्चों की फ़िल्म बनाने का ऑफर आया है..! कहते हैं! कुत्ता देखने में प्यारा सा होना चाहिये.. अगर फ़िल्म अच्छी बन जाती है! तो मज़ा ही आ जाएगा! कमाल हो जाएगा। अब तुमसे क्या छुपाना फ़िल्म का ऑफ़र सुनते ही.. हमारे दिमाग़ में झट्ट से तुम्हारे ही कुत्ते का ख्याल आया था.. तुम्ही तो कहती रहती हो! ” बहुत प्यारी है! हमारी कानू!” बस! तो लगा डाला तुम्हें फ़ोन!
और एकबार फ़िर हमनें भाईसाहब की बात का कोई भी जवाब दिए बगैर फ़ोन काट डाला था।
और एकबार फ़िर फ़ोन की घन्टी बजी थी.. लेकिन इस बार हमें इतनी देर से नोट कर रहे बच्चों ने हमारे हाथ से फ़ोन छीन कर बात करी थी.. भाईसाहब ने बच्चों को भी इसी तरह से बात समझाते हुए.. कहा था..
” अरे! भई! हम कुत्ते पर फ़िल्म बनाना चाहते हैं.. और तुम्हारी कानू ही हमारी समझ में आ रही है! पर तुम्हारी माँ हर बार हमें कोई भी जवाब न देते हुए.. हमारा फ़ोन काट देती है!”
और बच्चे बात समझ गए थे.. तुरंत ही फ़ोन हाथ में लेकर बोले थे..
” अरे! मामाजी! बात और कोई भी न है..! बस! आपने कानू को कुत्ता जो बोल दिया है”!
और भाईसाहब सारा क़िस्सा समझ गए थे.. और इस बार हमसे बात करते हुए.. कहने लगे थे,” अरे! भई! भूल हो गई..! क्या तुम कानू बिटिया संग थोड़े दिनों के लिए दिल्ली आ सकती हो! हम कानू को लेकर बच्चों पर फ़िल्म बनाना चाहते हैं!”।
और इस बार हमनें ख़ुश होकर जवाब दिया था..
” अरे! वाह! आईडिया अच्छा है! हम कानू बिटिया संग ज़रूर आ जाएंगें.. दिल्ली! और वैसे भी जब हमारी कानू परदे पर आएगी! तो सारी दुनिया को पता चल जाएगा… कि कानू जैसा सफ़ेद गुलाब का फूल तो कोई है..! ही नहीं”।
दरअसल भाईसाहब ने अभी हाल ही में फ़िल्म बनाने का नया काम शुरू किया है! और काम की शुरुआत में ही उन्हें यह बच्चों की फ़िल्म कुत्ते को लेकर बनाने का ऑफर मिल गया था.. अब है! तो कानू कुत्ता ही.. पर हम भी क्या करें..
पहुँच गए थे.. दिल्ली अपनी गुड़िया कानू को लेकर।
नई जगह और नए माहौल में कानू ने ज़ोर-ज़ोर से भौंकना शुरू कर दिया था.. आसपास भाईसाहब की फ़िल्म बनाने वाली पूरी टीम मौजूद थी.. सारी टीम कानू को देखने के लिए उत्सुक थी.. कि कैमरे में किस तरह की दिखेगी।
हमनें कानू को पहुंचकर मुश्किल से चुप कराते हुए, कहा था,” देखो! काना आप एकदम तुप हो जाओ! तुप होकर देखना काना कितना प्यारा लगेगा! और प्यार से समझाने पर कानू ने हमारी बात समझते हुए, अपनी फ्लॉवर जैसी पूँछ हिला दी थी।
टीम ने क़ानू के कई तरह से फ़ोटो शूट्स करने के बाद कहा था,” वाओ! मैडम! गुड.! Puctures! “।
और भाईसाहब से कहने लगे थे..
” कुत्ता प्यारा है..!. Sir.. मस्त फ़िल्म बनेगी!”।
हम वहीं खड़े थे.. कुत्ता सुनते ही मन तो कर रहा था.. कानू को लेकर वापस हो लें.. पर भाईसाहब का सोच कर खामोश रहे।
घर के गार्डन में शूटिंग के लिये लाइट्स कैमरा वगरैह सब फिट कर दिए गए थे.. रोज़ क़ानू गार्डन में जब खेलने निकलती थी.. तो फ़िल्म से रिलेटेड कानू की शूटिंग कर ली जाती थी.. वाकई बच्चों की फ़िल्म कानू को लेकर बहुत बढ़िया बनायी गई.. और फ़िल्मफ़ेअर में हमारी कानू ने बेस्ट pet का अवार्ड भी जीता था..
सभी मिलने वालों की हमारे घर पर लाइन लग गयी थी..
” अरे! वाह! भाभी..!! छा गई हमारी कानू पर्दे पर..!! अरे ! भई! अब तो हमारी कानू सेलिब्रेटी हो गई है”।
जानकारों के मुहँ से प्यारी कानू के लिए सेलिब्रेटी शब्द सुन ख़ुशी से फूला न समाए थे.. हम! आख़िर जान से भी ज़्यादा प्यारी जो है! हमें हमारी कानू।
भाईसाहब ने भी हमें बधाई देते हुए.. कहा था,” देखा! हो गया न कमाल! बिसनेस शुरू होते ही कानू ने हमें ज़बरदस्त profit करवा दिया!’।
बच्चों की इस फ़िल्म से जिसमें कानू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.. कानू सबकी मनपसंद सेलिब्रेटी बन गई थी.. और क़ानू मैडम संग एकबार फ़िर हम सब चल पड़े थे.. मनोरंजन की दुनिया की ओर।
कैसा लगा आपको हमारा यह कानू संग फ़िल्म बनाने का आईडिया! हमें लिखकर भेजें.. और जुड़े रहें कानू के प्यारे किस्सों के साथ।