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महारानी

bhartiya naari

गुलाबों के फूलों में बैठीं

रानी लग रहीं थीं

रानी नहीं तुम कोई

महारानी लग रहीं थीं

कुछ बोल उठोगी

ऐसा लग रहा था

सभी अपने तुमसे मिलने

को मौजूद थे

सभी संग आज तुम भी

ख़ुश हो रहीं थीं

सच! गुलाबों में

बैठी महारानी लग रहीं थीं

तस्वीर से ही भोजन का जायका चख

लिया था तुमनें

आज मोक्ष प्राप्त कर

मोह माया तज

अपनी आत्मा संग खड़ी

कहीं की रानी लग रहीं थीं

गुलाबों में बैठीं

सच की महारानी

लग रहीं थीं

मेहमानों संग आज हवा

में सबसे मिल

घूम रहीं थीं

आज तुम अनोखे अंदाज़

में सबसे मिल रहीं थीं

वाकई में माँ!

आज तुम कहीं की

पटरानी और महारानी

लग रहीं थीं

गुलाबों में बैठ

कहीं की रानी लग रहीं थीं।

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