तुमसे मिलके ऐसा लगा
तुमसे मिलके
अरमां हुए पूरे दिल के
सचमुच बहुत ही प्यारा सा गीत है.. और जिस फ़िल्म का यह गीत है, यानी के परिंदा.. अपने ज़माने की मशहूर फ़िल्म हुआ करती थी। यह फ़िल्म हम भी अपने पतिदेव के साथ सिनेमा हॉल में देखने गए थे.. और हमें भी बेहद पसन्द आई थी। पर आज इस फ़िल्म के गीत को गुनगुनाते हुए, हम फ़िल्म को याद नहीं कर रहे हैं.. बल्कि यह गीत आज हम अपनी प्यारी छोटी सी मासूम क़ानू को देखकर गुनगुना रहे हैं।
सच! इतना प्यार जो हमें हमारी कानू ने आज घर आने पर दिया है.. हमें पहले कभी किसी से नहीं मिला। आज जैसे ही हमारा माँ के घर छुट्टीयां बिता कर घर वापिस आना हुआ था, कि हम तो हैरान यह देखकर रह गए थे, कि प्यारी काना हमारे इंतेज़ार में अपना छोटा सा मुहँ और पेपर कटिंग जैसे कान दीवार पर रखकर खड़ी थी… जो हमनें नीचे से ही देख लिए थे।
हमारा ऊपर सीढ़ी चढ़ना होते ही, प्यारी कानू अपने आगे के दोनों पैर हमारे ऊपर रख.. गले से लग गई थी। मानो हमसे पूछ रही हो,” कहाँ चलीं गईं थीं, तुम माँ! देखो! तुम्हारे बगैर हम कितने उदास और अकेले हो गए थे.. वादा करो कभी न जाओगी यूँ हमें अकेला छोड़कर!”।
बहुत देर हमारी नन्ही सी गुड़िया बेटी कानू.. हमसे चिपकी हमारी गोद में ही बैठी रही थी, फ़िर हमनें ही कानू से कहा था..
” चलो! अब बच्चा नीचे उतर कर खेलेगा! और माँ तुम्हें नहलाकर वैसे ही प्यारी सी गुड़िया बना देंगी!”।
हमारी कानू पूरी मिट्टी में होकर हमसे मिली थी.. किसी ने भी छोटी सी कानू को नहीं नहला रखा था… हम इस बात का बहुत ही बुरा मान गए थे.. आख़िर कानू किसी के लिये कुछ भी सही, पर हमारे लिये हमारे बच्चों से भी बढ़कर है।
नहला- धुलाकर हमनें वापिस से कानू को प्यारी सी गुड़िया बना दिया था.. और प्यार से कानू ने हमारे मायके की बनी कचौड़ियों का आनंद भी खूब लिया था। कानू ने अपनी जीभ से हमारे हाथ को चाटकर कचौड़ियों के लिये हमें अपना प्यारा सा धन्यवाद दिया था.. जो हमें हमेशा के लिये याद रह गया।
अपने शेष काम समेटने से पहले हमनें अपनी क़ानू को एकबार फ़िर अपने आप से चिपकाते हुए.. कभी न बिछड़ने का वादा किया था.. और प्यारी कानू को यूँहीं चिपकाकर एक बार फ़िर हम सब अग्रसर हो चले थे.. इस जीवन के लम्बे रास्ते पर।
आप भी इसी तरह हमारी कानू के दुलार और प्यार का हिस्सा बने रहें.. और हमेशा की तरह जुड़े रहें कानू के किस्सों के साथ।

