भोपाल एकदम सूंदर और छोटी सी जगह है, एकदम शान्त ।और शहरों की तरह यहाँ करप्शन नहीं है। शहर की महिलाएँ आराम से देर रात को बाहर घूम सकती हैं, और बिना किसी डर के सुबह जल्दी चार बजे उठकर घूमने जा सकती हैं। मैं भी यहीं अपने परिवार के साथ एक सुन्दर और शांत कॉलोनी में रहती हूँ। पैदल घूमना फिरना मेरी आदत है। या यूँ कहिए शौक बन गया है। अक्सर सुबह और शाम को घूमने निकल जाया करती हूँ। स्वाभाविक है कि रास्ते में आते जाते लोगों से मुलाकात हो जाया करती है,और फिर बातचीत तो तय ही है।
ऐसा ही एक प्यारा सा वाक्या मुझे याद आता है,जैसा कि मैने अपने घूमने फिरने के शौक का ज़िक्र किया है,तो बस! मैं रोज़ शाम को घूमने निकल जाया करती थी…एक दिन मन हुआ कि चलो पार्क में घूमकर आया जाए..बस पीछे वाले पार्क में घूमने चली गयी। वहाँ उस पार्क के आसपास एक एक महिला रोज़ सूखी लकड़ियां चुगने और अपनी बकरियों को चराने के लिए लाती थी। युहीं बातचीत कर डाली मैने उससे, पूछने पर पता चला कि वह एक मुस्लिम स्त्री है…और वो लोग बकरियाँ और बकरे पालते हैं। उन्हें चराने के लिए वह रोज़ आ जाती है। पता नही क्या हो गया काफी टाइम से मुझे वह महिला दिख नही रही है..मन में ख़याल आया था कि कहीं और चली गयी होगी बकरियाँ चराने। अचानक एक दिन घूमते हुए मेरी मुलाकात फिर उसी महिला से हुई। मैं पूछ बैठी की”अरे!कहीं और चराने ले गईं थी क्या बकरियों को?”क्योंकि महिला एक मुस्लिम स्त्री थी उसने मुझे जवाब दिया था”क्या बताऊँ मेरा छोटा बेटा बहुत बीमार हो गया था…बकरीद आने वाली थी,हमने एक बकरे को पाल पनास कर उसी दिन के लिए तो बड़ा किया था..कि ईद वाले दिन हलाल करेंगे। इसी चिन्ता में मेरा बच्चा बहुत बीमार पड़ गया था, उसने कहा कि “में इसे बिल्कुल नही कटने दूँगा…हमने इसे इसलिए नही पाला कि ईद वाले दिन इसकी बली चढ़ाई जाए।” महिला का कहना था,कि बच्चे को बकरे से बहुत लगाव हो गया था और वह जानता था, कि बक़रीद वाले दिन उसे हलाल कर दिया जायेगा। मेरे दोबारा पूछने पर महिला ने उत्तर दिया था”बच्चे की ज़िद्द ,और उसका बकरे के प्रति प्यार और लगाव देखकर ,हम सब झुक गए और हम भी भावुक हो गए,बस!इसीलिए हमने बकरे को ईद वाले दिन हलाल नहीं किया।”मैने पूछा था…”अब कैसी तबियत है, बेटे की”। महिला ने उत्तर दिया था”बकरे के जीवित रहने की खुशी में पहले से ठीक है..और पूरी तरह ठीक हो जएगा। इसलिए इतने समय बाद आपको बकरियाँ चराती दिखी हूँ।”
बच्चे कि बकरे के प्रति मासूमियत भारी मानवता ने दिल जीत लिया था .,…मेरा। यह एक सच्चा वाक्या है..इसलिए आप सभी के साथ शेयर करना मुझे अच्छा लग रहा है।

