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खानदान 126

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” ये क्या कह रही हैं! आपके हस्बैंड के बारे में.. आप उन्हें थाने भेज दिजीये!”।

पुलिस वाले ने सुनीता से बात करते वक्त कहा था।

” लो फ़ोन कर लो बात!”।

सुनीता ने रमेश को फ़ोन पकड़ाते हुए, कहा था।

” नहीं मुझे नहीं करनी किसी से भी बात! तू ही कर ले!”।

रमेश ने सुनीता से थाने में बात करने के लिये हाथ हिलाते हुए.. साफ़ मना कर दिया था।

आगे की बात रंजना और थानेदार से सुनीता ने ही करी थी।

” देखिए मैडम! आपके हस्बैंड इन्हें मना करने पर भी फ़ालतू के फ़ोन कर-कर परेशान करते हैं! आप उन्हें कैसे भी करके थाने भेज दीजिए”।

” आप उस लडक़ी से मेरी बात करवाएं!”।

” हाँ! क्या..!! आज उस आदमी में तुमको कमियाँ नज़र आ रहीं हैं! पहले जब मेरे बच्चों के हिस्से की आइस-क्रीम खिलाता था.. तब बुरा नहीं लगता था.. फ़ोन कर-कर सुबह चार बजे गाड़ी सहित बुलाती थी.. अब पैसे ख़त्म हो गये हैं! तो थाने में कंप्लेंट करवा रही है..!! हैं..!!”।

” हाँ! मैं मानती हूँ! कि मैंने  साथ घुमा-फिरा है! पर अब.. आप तो उन्हें थाने भेजिए! मुझे उन्हीं से बात करनी है..! आपसे नहीं..!! मैं उनका यहाँ वेट कर रही हूँ! अगर वो थाने नहीं पहुँचते दस से पन्द्रह मिनट के अन्दर! तो मैं पुलिस लेकर आपके घर पहुँच जाऊँगी..!”।

और रंजना यहीं फोन काट देती है।

” वो लडक़ी घर आ रही है! आप ही थाने चले जाओ! नहीं तो यहाँ तमाशा करेगी..!”।

सुनीता ने रमेश को बता दिया था।

” हाँ. !! वो घर आएगी! अरे! धमका रही है! वो..!! घन्टा आएगी घर! और जा थाने.. अरे! ये तेरी नकल कर रही है! मैं इसे अच्छी तरह से जानता हूँ!  मुझे तो ऐसा लगता है.. ये थाने-वाने में बैठी ही नहीं है.. किसी राह चलते को पुलिस वाला बता रही है!”।

” नहीं वो पुलिस वाले ही थे.. पुलिस वालों के बात करने का स्टाइल ख़ूब पता है.. मुझे!”।

‘ अरे! मैं इसको अच्छी तरह से जानता हूँ.. कहीं बाहर कोई पकड़ लिए होंगें! उनको पुलिस वाला बता कर बात करा रही होगी! पूछने पर कह देगी.. भाई थे.. मेरे!’।

भाई थे.. मेरे! एक नई बात भाई वाली रंजना के पास से और निकल कर आई थी.. इस भाई में भी एक छोटी सी कहानी छिपी थी.. जिसे आप पढ़ सकते हैं.. अगले खानदान में।

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