कानू नाम आते ही मेरे चहरे पर मुस्कान आ जाती है, बहुत प्यारी, बहुत सुन्दर मेरी भोली सी कानू… कहने के लिये जानवर है पर नही मेरी बेटी है वो सब कहते हैं कि अरे .. कुत्ता पाला है .. बहुत ग़ुस्सा आता है ,कहना पड़ता है, बेटी है मेरी कुत्ता नही। पता ही नही चला कब कौन सा रिश्ता बनता चला गया और आज मेरे बच्चों की तरह हो गयी है। पिछ्ले जन्म का अधुरा रिश्ता और संस्कार हैं जो मेरे साथ है मेरी कानू मेरे साथ है। सुबह उठते ही भोली सी आंखें और चेहरा अपनी ओर खींचता है, उठते ही प्यार से गले से लगा लेती हूँ ,और तोतली आवाज़ में बच्चे की तरह कहती हूँ…. अतो तलो काचू ..
कानू की दुनिया

