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जीने की राह पचहत्तर

सीनियर एडवोकेट मिस्टर रोशन के चैंबर में गुदगुदे गद्देदार सोफों पर आराम से बैठी गाइनो असहज थी!

“मुझे जल्दी है मिस्टर रोशन!” गाइनो का उलाहना था। “आई कांट वेट!” वह कह रही थी। “अगर इसी तरह डेट्स मिलती रहीं तो ..”

“आप हमारे ऊपर भरोसा रखिए मैडम!” रोशन चहके थे। “हम से आगे कानून में कुछ भी नहीं है।” वो मुसकुराए थे। “दो महीने ..”

“मैं तो जा रही हूँ!” गाइनो ने सूचना दी थी।

“अगर अविकार ..?” रोशन ने प्रश्न किया था।

गाइनो चुप थी। रोशन भी चुप थे। एक कष्टकारक चुप्पी चैंबर को घेरे बैठी रही थी। अविकार ही जैसे हर हत्या की जड़ में था – उन दोनों ने महसूस किया था।

“मिले तो पागलखाने भिजवा देना!” गाइनो ने आदेश दिए थे। “मुझे फौरन खबर दे देना। मैं लौट आऊंगी।”

“वैरी वैल मैडम!” रोशन ने स्वीकार में सर हिलाया था।

“मैं चाहती हूँ मिस्टर रोशन कि अवस्थी इंटरनेशनल को मैं ..”

“पेपर तैयार हैं मैडम।” रोशन प्रसन्नता पूर्वक बोले थे। “आप साइन कर देना। पेमेंट आप दुनिया के जिस कोने में कहेंगी हो जाएगा!”

जहां गाइनो को प्रसन्नता हुई थी वहां हैरानी भी हुई थी कि मिस्टर रोशन कानून के ज्ञाता होने के साथ साथ एक सुलझे व्यापारी भी थे। अचानक उसे पीटर याद हो आया था। पीटर उसके इंतजार में एल ए मैं बैठा था। लॉस एंजिल्स में वह जायदाद खरीद कर रहना चाहती थी। मौका मुफीद था। क्योंकि मिस्टर रोशन ने उसे एक बेहद बड़ी खुशखबरी चलने से पहले ही पकड़ा दी थी!

लॉस एंजिल्स में पीटर के साथ गाइनो ने कई एस्टेट्स देखी थीं, मकान और आवास भी देखे थे। हर तरह का सौदा था। केवल कीमत देने तक की बिसात होना मेन मुद्दा था। अवस्थी इंटरनेशनल का सौदा ..? मन हुआ था कि फोन करके रोशन से पूछ ले कि क्या कुछ मिलने वाला था। लेकिन गाइनो ने यूं जल्दबाजी करना उचित नहीं माना था।

“आप के लिए रीगल एस्टेट सूट करेगी मैडम!” दलाल की अपनी दलील थी। “इसका ओनर भी आप की तरह का सैलानी था। अकेला रहता था। उसका परिवार ये चिड़ियाएं ही थीं। बर्ड सेंचुरी बनाना उसकी हॉबी थी। देखा ना आपने – कितना बड़ा विस्तार है। न जाने कहां कहां से इन पक्षियों को मंगवा कर ..”

“हुआ क्या – उसका?” गाइनो पूछ बैठी थी।

“प्लेन क्रैश में मौत हो गई थी।” दलाल बता रहा था। “था तो बड़ा भला आदमी लेकिन न जाने कौन सा अपराध उसे ले बैठा।” दलाल ने गाइनो की आंख में झांक कर कुछ पढ़ना चाहा था। “उसका नाम मिस्टर राईट था। वह हर काम सही करता था। बड़ा ही मारवेलस मैन था। जहीन था। जेंटलमैन था। लेकिन ..”

गाइनो को एक अजीब प्रकार का झटका लगा था। कहीं गहरे में उसे एक अपराध बैठा मिला था। लेकिन गाइनो ने उससे हाथ नहीं मिलाया था। न उससे अपने अंतर मन में बैठे रहने को कहा था। केवल उसे कड़ी निगाहों से घूरा था और उसका दिया परामर्श भी उसने नहीं माना था। अविकार उसका कोई नहीं था – उसने स्पष्ट कर दिया था।

रीगल स्टेट पर गाइनो का मन आ गया था।

खास कर बर्ड सेंचुरी में जमा भिन्न भिन्न प्रकार की चिड़ियाओं ने उसका मन मोह लिया था। कस तरह बातें करती थीं वो चिड़िया – एक अजूबा ही था। यह एक नया नवेला संसार था – जिसे गाइनो भी अपने बसा लेना चाहती थी। पीटर साथ रखने लायक आदमी नहीं था। वह लालची था, दगाबाज भी था और था एक नंबर का बेशर्म! रीगल स्टेट में वो अलग से अपनी निजी दुनिया बसाएगी, उसने निर्णय ले लिया था।

गाइनो की एक नई जीने की राह रोशन हो गई थी।

मेजर कृपाल वर्मा

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