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जीने की राह छप्पन

“मैं गाइनो के हाथ की कठपुतली बन गया था स्वामी जी!” अविकार बताने लगा था।

मुझे मासूम अविकार एक औरत के मक्कड़ जाल में फंसा मच्छर लगा था जो न जाने कैसे अपनी जान बचा कर भाग निकला था और आश्रम में आकर छुप गया था।

“अब हमें बड़ी होशियारी से काम लेना होगा, अविकार!” गाइनो ने मुझे समझाया था। “पहले तो तुम्हें रियल पागल की तरह एक्टिंग करनी होगी!” उसने अपनी गहरी नीली आंखों में मुझे भर कर घूरा था। “मेक नो मिस टेक अवि!” उसने चेतावनी दी थी। “मैंने कुछ ड्रग्स खरीद लिए हैं जो पागल बनाने में मदद करेंगे!” उसने सूचना दी थी। “और दाड़ी बढ़ा लो, मूँछें उगा लो। बालों को बढ़ने दो – बे तरतीब! कपड़े पहनो फटे पुराने, बिना धुले, बिना प्रेस के और जूते भी बिना लेस के होने चाहिए! नहाना धोना भी कुछ वक्त के लिए भूल जाओ ..”

“लेकिन .. लेकिन डार्लिंग मैं ये तो ..” मैं हकलाने लगा था।

“डरोगे तो फिर कुछ होने वाला नहीं है, अवि!” गाइनो नाराज थी। “मुझे क्या लेना देना है। मैं तो तुम्हारे लिए खट रही हूँ। मुझे क्या जरूरत है जो ..” वह लम्बे पलों तक मुझे घूरती ही रही थी। “चली जाती हूँ – अभी .. इसी वक्त ..”

“न न .. नहीं, डार्लिंग!” मैं तड़प उठा था। “मत जाओ मुझे अकेला छोड़ कर – मत जाओ ..” मैं गिड़गिड़ाने लगा था। “अंकल …”

“मार डालेगा तुम्हें भी!” गाइनो तड़की थी। “किसी मौके की तलाश में है!” गाइनो कुछ सोचने लगी थी। “अरबों की संपत्ति है – वह क्यों छोड़ने लगा?”

“ठीक है!” मैं मान गया था। “मैं .. मैं पागल बन जाऊंगा ..”

गाइनो तनिक मुसकुराई थी। मैंने एक अनाम खुशी को उसके चेहरे पर छाते देख लिया था।

“अभी से अवि मुंह एंठ एंठ कर बोलना आरंभ करो। इस तरह बोला करो जैसे तुम्हारा सारा संसार उजड़ गया है, तुम लुट गए हो, तुम्हें बरबाद कर दिया गया है और बीच बीच में अविनाश अंकल का नाम लेना जरूरी है।”

“इससे क्या होगा डियर?” मैं पूछ बैठा था।

“इसी से तो सब कुछ होगा!” गाइनो बताने लगी थी। “पागल साबित करने के लिए डॉक्टर से रिपोर्ट बनवानी होगी। फिर पुलिस में रिपोर्ट करनी होगी – अविनाश अंकल के नाम। उसके बाद पागल खाने में भर्ती होकर कोर्ट में केस डालना होगा।”

“लेकिन जब मैं पागल ही हो जाऊंगा तो फिर ..”

“मैं करूंगी ये सब काम। मैं तुम्हारी गार्जियन नियुक्त हो जाऊंगी!” गाइनो ने हंस कर बताया था। “मैं बताऊंगी कोर्ट को तुम्हारी करुण कथा!” गाइनो गंभीर थी। “किसी पत्रकार को पकड़ना होगा और उससे कहानी लिखवा कर अखबार में छपवानी होगी ताकि पूरी दुनिया को पता चल जाए कि अविनाश कितना बड़ा विलेन है और क्या क्या जुल्म ढा रहा है – तुम पर! मां-बाप के मरने के बाद अब ..”

“मुझे भी गाइनो की गढ़ी कहानी में दम दिखा था स्वामी जी!” अविकार बताने लगा था। “मुझे जंच गया था कि गाइनो हर फन मौला थी। उसे जिंदगी के हर कायदे कानून का ज्ञान था जबकि मैं हर तरह से बेवकूफ ही था।

“मेरी तरह!” मैंने भी मन में कहा था और हंस गया था। “पीतू – कचौड़ियां बनाता पीतू .. और .. पव्वा पी कर बगीचे की बेंच पर मस्त पड़ा सोता पीतू!” मुझे अपने दुर्दिन याद हो आए थे। “और गुलनार ..? उसके इशारों पर नाचता पीतू ..!” सारा का सारा विगत मेरे सामने आ खड़ा हुआ था। “और .. औरत ..?”

“फिर क्या होगा, डार्लिंग?” मैंने अबोध शिशु की तरह गाइनो से पूछा था।

“हमें हमारा साम्राज्य मिल जाएगा!” गाइनो बताने लगी थी। “और हम फिर से ..” वह रुकी थी। उसने मेरे हाथ को अपने हाथों में भर लिया था। “वी विल फ्रीक इन टू द वुड्स!” वह जोरों से हंसी थी। “वी विल लिव लाइफ – द किंग साइज!”

और एक सुखद जीने की राह महकते उपवनों के पार हम दोनों को उंगली पकड़ कर लिए चली जा रही थी।

मैं प्रसन्न था।

मेजर कृपाल वर्मा

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