सुगम है नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा,
यह वर्षारंभ है मन के मांगल्य का उत्सव
पंक्षी भी हैं करते पेड़ों पर कलरव
मंद सुगंधित हवा बह रही,
वृक्षों पर नव पल्लव चमके,
भ्रमर गुंजित मधुकर गुंजित |
कोयल मंजरियों पर कुहके
शक्ति उपासना मन में पुलकित ||
~कुमार गौरव
