रौशन तुम्हीं से दुनिया रौनक हो तुम जहाँ की
फूलों में पलने वाली रानी हो गुलिस्ताँ की
प्यारी कानू वाकई में तुम हमें जान से भी ज़्यादा प्यारी हो गयी हो। सुबह होते ही जब हमें हमारा सफेद गुलाब का फूल नज़र आता है… तो हमारा मन खुशी और प्यार से भर जाता है। तुम्हारे वो मुलायम और प्यार भरे स्पर्श से ही हमारे बेहतर दिन की शुरुआत होती है। कितना सारा प्यार करती हो तुम हमसे। और हम भी कानू-मानू को कितना सारा प्यार करते हैं.. तुम्हारी हमसे नज़दीकी एक अधूरे रिश्ते को पूरा करने का एहसास जताती है।
अब तो हमारा अपने निजी काम करने में भी बहुत मन लगने लगा है.. तुम जो हमारे साथ-साथ लगी रहती हो। वो तुम्हारा हमें दूर से प्यार से देखना और अपनी फ्लॉवर जैसी पूँछ हिलाते हुए दौड़कर हमारे पास आना और अपने हाथ हमारे ऊपर रख हमसे कुछ कहना.. सच! कानू आज हम सोचने पर मजबूर हो जाते हैं, कि कानू हमारे संसार में नहीं आयी होती तो हमारा क्या होता.. कोई हमें इतना प्यार भी कर सकता है.. ये हमें पता ही न चल पाता।
अपनी कानू के आगे तो हमें सारी ख़ुशियाँ फ़ीकी सी लगने लगी हैं। जब तुम हमारे गाल पर अपनी गीली-गीली सी नाक लगाती हो.. क्या कहना चाहती हो..क्या तुम हमसे ये कहती हो.. तुम हमसे कितना सारा प्यार करती हो। हमें भी तुम्हारे गाल पर पप्पी करना बहुत ही अच्छा लगता है..तुम्हारे गाल को चूमते वक्त तुम्हारे जानवर होने का एहसास कभी भी नहीं हुआ हमें.. कभी ख्वाबों में भी न सोचा था, कि कुत्ता भी दिल के इतने करीब आ सकता है। जब भी तुम्हें कुत्ता कहते हैं… अपने आप से कई बार माफ़ी माँगते हैं।
क़ानू तू कितने प्यार से गोद में आकर लड्डू बनकर बैठ जाता है.. जब तुम हमारी गोद में लपककर बैठती हो तो ऐसा लगता है, जैसे कह रही हो,”माँ तो सिर्फ़ मेरी ही हैं”।
मेरी प्यारी कानू
सबसे न्यारी कानू
तुम कितनी सुन्दर
मेरी भोली कानू
नार में सुनहरे घुँघरू
तुम्हारे कितने जचते कानू
हरदम छन-छन करतीं
चारों ओर रौनक भरतीं
तुमसे ये साँसे और जीवन कानू
कभी न जाना हमें छोड़ कर कानू
अब न रह पाएँगे तुम्हारे बगैर कानू ।
आज हम अपनी कानू के बारे सिर्फ़ इतनी ही प्यार भरी लाइनें लिखना चाहते हैं। हमारी और हमारे सारे परिवार की प्यार भरी और कानू के रंग में रंगी ज़िंदगी एक बार फ़िर जिंदा दिली से चल पडी है। हमारे परिवार की गाड़ी को चलाने में मुख्य भूमिका निभा रहीं है. .प्यारी कानू ।

