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नन्ही चिड़िया

पंख फड़फड़ाते थे

चिड़िया के

उड़ना चाहती नन्ही

चिड़िया

माँ तू क्यों रोके

है मुझको

आसमान में उड़ना

मैं चाहती

छू लूं

मैं नभ के उस शिखर को

जो कभी थी तू

छूना चाहती

डर के कैद रही पिंजरे में

नहीं तो तू भी

गगन चूमती

फड़फड़ा रहें हैं

पंख मेरे अब

नन्ही चिड़िया उड़ना चाहती

तोड़ के पिंजरा उड़ने दे माँ

छू लेने दे तू

गगन की चोटी

पंख फड़फड़ाते चिड़िया के

नन्ही चिड़िया उड़ना चाहती

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