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खानदान 124

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” अब तो सब-कुछ बेच-वेच कर दुबई जाने का इरादा है। लडक़ी पीछे पड़ रही है.. मेरे साथ दुबई चलो!”।

यह ख़बर अब पूरे घर में आग की तरह फैल गई थी। सुनीता ने दुबई जाने का जैसे गाना ही बना डाला था। अब तो हर घर के हर आदमी ने रमेश और दुबई का जैसे जुमला ही बना डाला था।

” चला जागा दुबई! हमनें के कहे है!”।

दर्शनाजी ने रमेश के दुबई जाने पर मज़ाक बनाते हुए, हँसकर कहा था।

पासपोर्ट वगरैह बनने के बाद रंजना इंदौर में रमेश के संग दुबई जाने की सारी तैयारियाँ कर अब दुबई बहन के पास रहने जाने के लिये पूरी तरह से तैयार थी।

” वो आ रही है..!! उसको मुझे एयरपोर्ट छोड़ने जाना है.. पहले दिल्ली जाएंगें!”।

रमेश ने एकबार फ़िर से कान के पर्दे फाड़ते हुए, चिल्लाना शुरू कर दिया था। रंजना का दुबई जाना.. चुनाव प्रचार के हल्ले जैसा काम हो गया था। रंजना बहन को लेकर माँ के घर से इंदौर आ पहुँची थी.. और रमेश रंजना और उसकी बहन को एरपोर्ट पर छोड़ घर वापिस आ गया था।

” बस! अब तो मेरा भी दुबई जाने का नंबर लगना है! अपन यहाँ आएंगे ही नहीं!”।

तोते की तरह दुबई का रमेश का रटना शुरू हो गया था। रमेश और रंजना की फोन पर बातें और वीडियो कॉल होने लगे थे। कि अचानक से एक दिन.. रमेश ने रंजना से चैटिंग करते वक्त ही फ़ोन पर किसी दूसरे आदमी की चैटिंग पकड़ ली थी.. जो रंजना से बिलकुल रमेश वाले अंदाज़ में ही बात किये जा रहा था। दरअसल बात यह हुई थी.. कि यह आदमी ग़लती से रमेश से भी बात कर बैठा था, और दोनों ही आपस में एकदूसरे से पूछ बैठे थे.. कि रंजना को कैसे जानते हैं! अभी रंजना के पास यह बात रमेश ने नहीं पहुंचाई थी।

” अरे! इसे क्या हो गया है! दुबई जाकर.. अब तो फ़ोन पर भी मुझसे ठीक से बात नहीं करती! हम्म! लफ़ड़ा लगता है..!! कुछ इसका! पता करना पड़ेगा!”।

अब थोड़े दिनों बाद ही रमेश को रंजना के बातचीत करने के तरीके अजीब लगने लगे थे। रमेश का दिमाग़ रंजना को पकड़ने के चक्कर में तेज़ी से काम करने लग गया था। दो एक महीने दुबई में रहने के बाद अब रंजना वापिस इंदौर आ रही थी.. जानकर रमेश की ख़ुशी दुगनी हो चली थी.. एकबार फ़िर एयरपोर्ट से रंजना को रिसीव करने के लिये रमेश तैयार खड़ा था।

रंजना आ तो गई थी.. पर पता नहीं क्यों रमेश के लिये अपने संग रूखा पन भी साथ लेकर आई थी। जो रमेश ने रंजना को एयरपोर्ट से लाते वक्त ही भाँप लिया था। अगले दिन जब रमेश रंजना से मिलने उसके कमरे पर गया.. तो हैरानी की बात थी.. चंद ही मिनट के अंदर एक अजीब सी टेंशन लिये वापिस भी आ गया था।

” चना जोर गरम बाबू मैं लाया मज़ेदार..!! चना जोर गर्म!”।

खानदान का भी मसालेदार चना जोर गर्म अब पूरी तरह से तैयार हो चुका है! जिसका स्वाद लेने के लिये बने रहें खानदान के हर भाग के साथ।

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