ऐसा लग रहा
था लंबी
सुनसान सड़क
पर तुम
तेज़ी से
चलती चलीं
जा रहीं थीं
मैं तुम्हारे
पीछे ही तो
थी
पर तुमसे
बहुत दूर
होकर भी
पहचान लिया
था मैंने
तुमको माँ
हाँ! वो
तुम ही
तो थीं
जो मुझे अब
धुंदली सी
दिखाई देने
लगीं थीं
मैं भी
बहुत तेज़
चल रही
थी पर
पहुँच न
पाई थी
तुम तक।
माँ..!!!
पुकारा था
मैने तुम्हें
मेरी पुकार
पहुँच गई
थी शायद
तुम तक
मुड़कर देख
मुस्कुराईं तो थीं
हाँ!
तुम भी
पहचान गईं
थीं मुझे
शायद
पर फ़िर
न जाने
क्यों
तेज़ी से चलते
ही चलते
ओझल क्यों
हो गईं
थीं तुम
माँ..!!
मैं तेज़
गति से
चलते हुए
भी तुम
तक पहुँच
न पाई थी।

